माला-1242:क्या भोग नाम-जप में बाधा डालते हैं?श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: नाम जप में सच्चा प्रेम और अनुभव कैसे आए? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि प्रेम की जड़ स्वयं भगवान का नाम है। यदि नाम में स्थिरता आ जाए तो प्रेम अपने आप प्रकट होता है। शुरुआत में मन नहीं लगता, नाम कड़वा लगता है, लेकिन यह हमारी स्थिति है, नाम की नहीं। जैसे

माला-1239: काम क्या है? इस पर विजय कैसे पाई जाए?श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,काम क्या है? इस पर विजय कैसे पाई जाए? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि काम कोई बाहरी वस्तु नहीं है, बल्कि यह मन की एक प्रवृत्ति है। जब मनुष्य भगवान का चिंतन छोड़कर विषयों का चिंतन करता है, तो विषयों के प्रति आसक्ति उत्पन्न होती है। उस आसक्ति को भोगने की इच्छा

माला-1228:भगवान की इच्छा में अपनी इच्छा कैसे मिलाएं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: पत्नी के माध्यम से भक्ति मार्ग में खिंचने पर क्या यह बंधन है या कृपा? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यह बंधन नहीं, बल्कि भगवान की विशेष कृपा है। संसार में बहुत लोग ऐसे होते हैं जिन्हें भक्ति का अवसर ही नहीं मिलता, लेकिन यदि किसी को ऐसा जीवनसाथी मिल जाए जो उसे

माला-1219:भीतर मृत्यु का भय और अधूरापन क्यों लगता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,भीतर मृत्यु का भय और अधूरापन क्यों लगता है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यह भय इसलिए उत्पन्न होता है क्योंकि मनुष्य को भीतर से यह अनुभव होता है कि जिस उद्देश्य के लिए जीवन मिला था, वह अभी पूरा नहीं हुआ। जब साधक को लगता है कि जीवन यूँ ही निकल

माला-1217:भय क्यों लगता है और निर्भय कैसे बनें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,लोगों की शरीर पर की गई टिप्पणियों से मन दुखी हो जाए तो क्या करें? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यह शरीर हमारे कर्मों के अनुसार मिला हुआ है—कोई पतला है, कोई मोटा, कोई सुंदर है, कोई साधारण। इसमें दुखी होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह शरीर हम नहीं हैं, बल्कि

माला-1216:गंभीर बीमारी में भजन और शरीर की चिंता में संतुलन कैसे रखें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: गंभीर बीमारी में भजन और शरीर की चिंता में संतुलन कैसे रखें? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि शरीर भी भगवान का दिया हुआ साधन है, इसलिए उसकी पूरी तरह उपेक्षा करना उचित नहीं है। लेकिन साथ ही यह भी सत्य है कि शरीर नश्वर है और एक दिन समाप्त हो जाएगा। इसलिए साधक

माला-1215:नाम जप से वास्तव में क्या परिवर्तन होता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: माया और भोग बार-बार साधक को गिराते क्यों हैं? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि माया भगवान की ही शक्ति है, जो साधक की परीक्षा लेती है। वह हमारे सामने बार-बार भोग, मान, प्रतिष्ठा और आकर्षण रखती है ताकि हम अपने मार्ग से भटक जाएँ। जब साधक भगवान की ओर बढ़ना चाहता है, तब

माला-1214:विवेक व्यवहार में क्यों नहीं उतरता? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,संतों के बिना मार्ग कैसे चले? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि केवल शास्त्र पढ़ने से पूर्ण लाभ नहीं मिलता, जब तक कोई प्रगट संत न मिले। शास्त्र दवा है, लेकिन संत वैद्य हैं। संत ही हमारे स्वभाव और स्थिति के अनुसार मार्ग बताते हैं। इसलिए यदि प्रगट संत न मिले तो उनकी

माला-1213:कर्म क्या है? क्या भगवान ही कर्मों का फल तय करते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, मैं ईमानदारी से जीवन जीता हूँ और दूसरों की मदद करता हूँ, फिर भी मुझे दुख क्यों मिलता है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि संसार में जो भी सुख और दुख हमें प्राप्त होते हैं, वे केवल इस जन्म के कर्मों से नहीं आते, बल्कि हमारे पूर्व जन्मों के कर्मों का

माला-1212:क्या मृत्यु का समय पहले से तय होता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: गुरु अपराध क्या है और इससे कैसे बचें? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि गुरु ही साधक को नाम, मंत्र, भजन और भगवान तक पहुँचने का मार्ग प्रदान करते हैं। इसलिए गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण भक्ति का आधार है। गुरु अपराध का अर्थ है गुरु की आज्ञा का उल्लंघन करना, गुरु की