माला-1302: क्या सिर्फ ईमानदारी से परिवार चलाने से मोक्ष मिल सकता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, क्या केवल ईमानदारी से परिवार का पालन-पोषण करने से मोक्ष मिल सकता है, या भगवान का नाम जप भी आवश्यक है? उत्तर: महाराज जी ने इस प्रश्न का उत्तर बहुत स्पष्ट रूप से दिया। उन्होंने कहा कि केवल परिवार का पालन-पोषण करना, मेहमानों की सेवा करना, माता-पिता का आदर करना और

माला-1300: आत्मा शरीर में कहाँ रहती है, और परमात्मा का अनुभव कैसे किया जा सकता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,आत्मा शरीर में कहाँ रहती है, और परमात्मा का अनुभव कैसे किया जा सकता है? उत्तर: महाराज जी के अनुसार आत्मा और परमात्मा किसी विशेष अंग में सीमित होकर नहीं रहते, बल्कि सम्पूर्ण अस्तित्व में व्याप्त हैं। जैसे दूध में घी सर्वत्र उपस्थित रहता है, लेकिन बिना उचित प्रक्रिया के दिखाई नहीं

माला-1298: “श्रीजी, मेरी ये इच्छा पूरी मत करना…” भक्त के मन में ऐसा भाव क्यों आता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, श्रीजी से कुछ मांगने का मन बनता है, लेकिन मांगने के बाद उसे वापस लेने का भाव क्यों आता है? उत्तर: महाराज जी के अनुसार यह स्थिति साधक के भीतर एक साथ चल रहे दो भावों का परिणाम है। एक ओर देहभाव है, जिसके कारण मनुष्य अपनी आवश्यकताओं, दुखों और इच्छाओं

माला-1297: कर्मकांड में किसका अधिकार पहले—गरीब भक्त या धनवान व्यक्ति? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, यदि गरीब और धनवान यजमान के कार्य एक साथ हों तो किसे प्राथमिकता देनी चाहिए? उत्तर: महाराज जी के अनुसार किसी भी धार्मिक कार्य में धन नहीं बल्कि भाव की प्रधानता होनी चाहिए। यदि कोई गरीब व्यक्ति सच्चे हृदय से सेवा या कर्मकांड कराने आता है और दूसरी ओर कोई धनवान

माला-1296: बच्चों से मोह या भगवान से प्रेम? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, हम अपने बच्चों से मोह का त्याग कैसे करें? क्या बच्चों में भगवत भाव करके उनका पालन-पोषण करना उचित है? उत्तर: महाराज जी ने इस प्रश्न का अत्यंत मार्मिक उत्तर देते हुए कहा कि बच्चों से मोह त्यागने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि मोह को भगवत भाव में परिवर्तित करने की

माला-1294: यदि नरक में सजा मिल गई, तो फिर जन्म में दुख क्यों? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,यदि मनुष्य अपने पाप कर्मों का दंड नरक में भोग चुका है, तो मनुष्य जन्म में उसे फिर दुख और कष्ट क्यों भोगने पड़ते हैं? उत्तर: महाराज जी ने इस प्रश्न का अत्यंत गूढ़ उत्तर देते हुए बताया कि पाप कर्मों का फल केवल एक स्तर पर नहीं मिलता। जैसे किसी अपराधी

माला-1292: क्या संतों को प्रणाम करने से उनका पुण्य कम होता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,क्या संतों को प्रणाम और नमस्कार करने से उनके भजन का फल कम हो जाता है? संतों का सम्मान और अभिनंदन किस प्रकार करना चाहिए? उत्तर: महाराज जी ने बहुत सुंदर ढंग से समझाया कि सच्चे संत और भगवत प्राप्त महापुरुष शुभ और अशुभ दोनों से परे होते हैं। जिस प्रकार समुद्र

माला-1291: कितनी सीमा तक क्षमा करनी चाहिए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: किसी व्यक्ति को कितनी सीमा तक क्षमा करनी चाहिए? विशेष रूप से यदि कोई बार-बार शारीरिक, मानसिक या चरित्र को हानि पहुँचाने वाला व्यवहार करे, तो क्या उसे क्षमा करना चाहिए या कानून का सहारा लेना चाहिए? उत्तर: महाराज जी ने स्पष्ट कहा कि क्षमा का अर्थ यह नहीं है कि अपराध को

माला-1286: मृत्यु के बाद कौन चला जाता है और उसे कैसे जाना जाए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और हम कहते हैं कि “वह चला गया”, तो वह जो चला गया उसे कैसे पहचाना जाए? अपने भीतर स्थित वास्तविक आत्मस्वरूप को कैसे जाना जाए? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि जिस तत्व को हम “मैं” कहते हैं, वही वास्तविक आत्मस्वरूप है। शरीर

माला-1284: कर्म क्या है, विकर्म क्या है और अकर्म क्या है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: हम सबका जन्म हरि नाम जपने के लिए हुआ है, लेकिन हमें लगता है कि जीवन का कोई और भी उद्देश्य होगा। मेरी जिंदगी का वास्तविक उद्देश्य (Purpose of Life) क्या है? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य संसार में केवल कर्तव्य निभाना, धन कमाना, परिवार बनाना या