माला-1219:भीतर मृत्यु का भय और अधूरापन क्यों लगता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
प्रश्न 1: महाराज जी,भीतर मृत्यु का भय और अधूरापन क्यों लगता है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यह भय इसलिए उत्पन्न होता है क्योंकि मनुष्य को भीतर से यह अनुभव होता है कि जिस उद्देश्य के लिए जीवन मिला था, वह अभी पूरा नहीं हुआ। जब साधक को लगता है कि जीवन यूँ ही निकल