माला-1282: क्या भक्त के अंदर अवगुण या दोष हो सकते हैं ? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
प्रश्न 1:महाराज जी, क्या भक्त के अंदर अवगुण या दोष हो सकते हैं, अथवा सच्चे भक्त में कोई अवगुण नहीं होता? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि भक्त दो प्रकार के होते हैं—एक साधक अवस्था में और दूसरे सिद्ध अवस्था में। जो साधक है, अर्थात जिसने भगवान की ओर चलना प्रारंभ किया है, उसमें दोष