माला-1282: क्या भक्त के अंदर अवगुण या दोष हो सकते हैं ? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, क्या भक्त के अंदर अवगुण या दोष हो सकते हैं, अथवा सच्चे भक्त में कोई अवगुण नहीं होता? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि भक्त दो प्रकार के होते हैं—एक साधक अवस्था में और दूसरे सिद्ध अवस्था में। जो साधक है, अर्थात जिसने भगवान की ओर चलना प्रारंभ किया है, उसमें दोष

माला-1281: अहंकार का नाश शीघ्र कैसे हो सकता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,मेरे गुरु देहत्याग कर चुके हैं और उन्होंने कोई गुरु मंत्र नहीं दिया था। अब मुझे कौन-सा जाप करना चाहिए और गुरु के विषय में मेरा भाव कैसा होना चाहिए? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि गुरु केवल शरीर नहीं हैं, बल्कि गुरु एक दिव्य तत्व हैं। यदि किसी साधक के गुरु

माला-1280:आत्मा का निवास शरीर में कहाँ है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,यदि मृत्यु के समय मुख से “राधा” नाम न निकले, लेकिन मन में भगवान का स्मरण हो, तो क्या भगवत प्राप्ति होगी? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि भगवत प्राप्ति केवल अंतिम क्षण में मुख से नाम निकलने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस समय चित्त की स्थिति क्या है, यह अधिक

माला-1276: लोभ और कामना में क्या अंतर है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, पश्यंती वाणी से जाप एवं निर्वाणी क्रिया में क्या भेद है? उत्तर:महाराज जी ने बताया कि नाम जप की कई अवस्थाएँ होती हैं—वैखरी, उपांशु, मध्यमा, पश्यंती और परा। साधक पहले वैखरी से प्रारंभ करता है जहाँ जिह्वा से नाम लिया जाता है। फिर धीरे-धीरे उपांशु और मानसिक जप में प्रवेश होता है।

माला-1275:यदि सब कुछ प्रारब्ध से होना है, तो डॉक्टर के पास क्यों जाएं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, यदि सब कुछ प्रारब्ध से होना है, तो डॉक्टर के पास क्यों जाएं? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि प्रारब्ध को कोई टाल नहीं सकता। यदि शरीर में रोग आया है और डॉक्टर के पास जाना प्रारब्ध में लिखा है, तो मनुष्य चाहे न भी चाहे, परिस्थितियाँ उसे वहां तक ले जाएंगी।

माला-1274:मेरे निर्णय हमेशा गलत क्यों हो जाते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,मेरे निर्णय हमेशा गलत क्यों हो जाते हैं? उत्तर: महाराज जी बताते हैं कि मनुष्य केवल वर्तमान बुद्धि से निर्णय लेता है, लेकिन उसके पूर्व जन्मों के कर्म और प्रारब्ध भी परिणामों को प्रभावित करते हैं। कई बार मनुष्य बहुत सोच-समझकर कार्य करता है, फिर भी विपरीत फल मिलता है क्योंकि पूर्व

माला-1273:क्या सभी कर्मों का हिसाब इसी जन्म में पूरा हो जाता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: क्या सभी कर्मों का हिसाब इसी जन्म में पूरा हो जाता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि मनुष्य के करोड़ों जन्मों के संचित कर्म होते हैं। उनमें से कुछ कर्मों का फल इस जन्म में भोगने के लिए मिलता है, जिससे शरीर की रचना होती है। लेकिन सभी कर्म एक ही जन्म में

माला-1271:जब मन बार-बार बुराई और विषयों की ओर भागे तो क्या करें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: क्या मांसाहारी व्यक्ति को मंदिर का प्रसाद देने से पाप लगता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान का प्रसाद और चरणामृत अत्यंत पवित्र होता है। यदि कोई व्यक्ति अभी मांसाहार या अभक्ष पदार्थों का सेवन करता है, तब भी उसे श्रद्धा से प्रसाद देना चाहिए। महाराज जी कहते हैं कि भगवत प्रसाद

माला-1270:क्या आत्मा सच में होती है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,क्या आत्मा सच में होती है? उसका वास्तविक स्वरूप क्या है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि आत्मा केवल कल्पना नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का वास्तविक आधार है। मनुष्य सामान्यतः अपने शरीर को ही “मैं” मान लेता है, जबकि शरीर तो केवल एक ढांचा है। महाराज जी समझाते हैं कि हम कहते हैं—“मेरा

माला-1266:कर्म करते हुए भी निर्लिप्त कैसे रहा जाए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, “पानी में मीन प्यासी” का वास्तविक भावार्थ क्या है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि “पानी में मीन प्यासी” का अर्थ है कि जिस आनंद की खोज मनुष्य बाहर संसार में कर रहा है, वह आनंद वास्तव में उसके भीतर ही मौजूद है। जैसे मछली पानी में रहते हुए भी यदि प्यास महसूस