माला-1062: नाम में अनन्यता कैसे प्राप्त की जा सकती है?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: भगवत प्राप्ति के समय आप ज्ञान मार्ग में थे या भक्ति मार्ग में? उत्तर:प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि भगवत प्राप्ति किसी एक मार्ग से नहीं होती — यह गुरु कृपा से होती है। जब हम भगवान का भजन करते हैं, वही भक्ति कहलाती है; भजन से जो ज्ञान उत्पन्न होता है, वह

माला-1061: सबसे उत्तम मंत्र कौन-सा है?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: सबसे उत्तम मंत्र कौन-सा है जिसे हर कोई उच्चारित कर सकता है? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि सबसे उत्तम मंत्र वह है जो भगवान के नाम से जुड़ा हो। भगवान के नाम अनंत हैं — राम, कृष्ण, राधा, हरि — ये सभी नाम पवित्र हैं और इन्हें कोई भी उच्चारण कर सकता है।

माला-1060: गुरु-कृपा का वास्तविक अर्थ क्या है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद जी महाराज

प्रश्न 1: महाराज जी, यदि हम अपनी बीमारी को राधा रानी की कृपा मानें, तो क्या यह सही है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज जी कहते हैं कि बीमारी स्वयं कृपा नहीं है, बल्कि उस बीमारी के बीच भी भक्ति और नाम-स्मरण में टिके रहना ही कृपा का वास्तविक स्वरूप है। रोग हमारे पिछले कर्मों का

माला-1059: राधा रानी को ‘प्रेम स्वरूपा’ क्यों कहा जाता है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद जी महाराज

प्रश्न 1: क्या बोलकर नाम जपने से वही लाभ मिलता है जो मौन रहकर जपने से मिलता है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज समझाते हैं कि नाम-जप के तीन रूप होते हैं — वाचिक, उपांश और मानसिक। जब हम आवाज़ में नाम लेते हैं, उसे वाचिक जप कहा जाता है। जब केवल होंठ हिलते हैं लेकिन

माला-1058: अकेले रहने की सीमा क्या है?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद जी महाराज

प्रश्न 1: काशी और वृंदावन की आपकी आध्यात्मिक अनुभूति में क्या अंतर है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि काशी ज्ञान का केंद्र है, जबकि वृंदावन प्रेम का स्रोत। काशी में आत्मा को ज्ञान रूपी भोजन मिलता है, परंतु वृंदावन में प्रेम की प्यास बुझती है। वहां की अनुभूति इतनी मधुर है कि जितना

माला-1057: जब कोई व्यक्ति हम पर गुस्सा करता है, श्री प्रेमानंद जी महाराज के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद जी महाराज

प्रश्न 1: जब कोई व्यक्ति हम पर गुस्सा करता है या अपशब्द कहता है तो क्या वह हमारा ही कर्म है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज समझाते हैं कि संसार में जो कुछ हमारे साथ घटता है, वह सब हमारे पूर्वजन्मों के कर्मों का फल होता है। कोई व्यक्ति जब हमें अपमानित करता है या गुस्सा

माला-1056:क्या किस्मत जैसा सच में कुछ होता है?, श्री Premanand Maharaj Ji के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

Premanand Maharaj Ji

प्रश्न 1: क्या किस्मत जैसा सच में कुछ होता है? क्या हमारी किस्मत हमारे ही हाथों में होती है? उत्तर:Premanand Maharaj Ji बताते हैं कि किस्मत कोई कल्पना नहीं, बल्कि हमारे कर्मों का प्रतिफल है। जीवन में जो कुछ घटता है, वह हमारे पूर्व जन्मों और वर्तमान कर्मों के अनुसार ही होता है। मनुष्य सोचता

माला-1055: क्या भगवान से सांसारिक वस्तुएँ माँगना उचित है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद जी महाराज

प्रश्न 1: भक्ति करते समय मन में भय और संशय क्यों आते हैं, और उन्हें कैसे दूर किया जाए? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं — जब तक हमारी सच्ची शरणागति पुष्ट नहीं होती, तब तक मन में भय और संशय बने रहते हैं। जब हम भगवान की शरण में हैं, तो भय का कोई

माला-1054: भजन करते समय गंदे विचार क्यों आते हैं ?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: भजन करते समय गंदे विचार क्यों आते हैं? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी समझाते हैं — “जब साधक भजन करता है और मन में गंदे विचार आने लगते हैं, तो घबराना नहीं चाहिए। ये विचार गंदे नहीं हैं, ये तुम्हारे भीतर की गंदगी है जो अब बाहर निकल रही है।” महाराज जी कहते हैं

माला-1053: भक्ति का सबसे शुद्ध रूप क्या है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 7: महाराज जी, भक्ति का सबसे शुद्ध रूप क्या है? उत्तर:प्रेमानंद महाराज जी बहुत सरलता से बताते हैं कि भक्ति का सबसे शुद्ध और वास्तविक रूप नाम-जप है। वे कहते हैं कि लोग अक्सर भक्ति को आँसुओं से जोड़ते हैं — जब आँसू बहते हैं तो लगता है कि प्रेम प्रकट हो गया। लेकिन