माला-1195:क्या आत्मा को कुछ पाना है या आत्मा पूर्ण है?श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
1️⃣ प्रश्न: गुरु की अंग सेवा की इच्छा — स्वार्थ या विशुद्ध प्रीति? उत्तर:महाराज जी स्पष्ट करते हैं कि संसार की प्रीति और गुरु-इष्ट की प्रीति …
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माला-1194:क्या आत्मा को कुछ पाना है या आत्मा पूर्ण है?श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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माला-1193:क्या जन्म वास्तविक है या सब स्वप्न मात्र है?श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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माला-1192:संत महापुरुषों के दर्शन का वास्तविक फल क्या है?श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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माला-1191:गुरुदेव में भगवान की भावना कैसे पुष्ट करें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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माला-1190:मन पूर्ण समर्पण से क्यों डरता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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माला-1189:आत्मज्ञान के बाद ‘मैं’ समाप्त हो जाता है या रहता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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माला-1188:“जिसमें तेरी रज़ा है उसी में राज़ी” यह भाव स्थायी कैसे बने? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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माला-1186:भक्ति करते-करते “मैं कुछ बन गया हूँ” ऐसा अहंकार क्यों आता है और इससे कैसे बचें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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माला-1185:भगवान को अपना मानकर संसार में व्यवहार कैसे करें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
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