premanand maharaj ji
महाराज जी

माला-1180:सभी इच्छाओं को प्रभु से जोड़कर एकरूप कैसे हों? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

प्रश्न 1: भगवान के प्रेम का अनुभव पूर्ण होता है या समर्पण के अनुसार? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान का प्रेम किसी सीमा में बंधा …

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shriradhanaamras@gmail.com

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