माला-1393: मेरे अंदर अहंकार नहीं, फिर भी लोग ऐसा क्यों समझते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,मेरे अंदर अहंकार नहीं, फिर भी लोग ऐसा क्यों समझते हैं? उत्तर:महाराज जी इस प्रश्न को बहुत गहराई से समझाते हैं। वे कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति स्वयं यह कहने लगे कि “मेरे अंदर अहंकार नहीं है”, तो यहीं से एक सूक्ष्म अहंकार दिखाई देने लगता है। क्योंकि यह अनुभव किसने

माला-1392: झूठ बोलकर बच रहे हैं या फँस रहे हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,झूठ बोलने की आदत हो गई है, अब पत्नी भी विश्वास नहीं करती। यह आदत कैसे छोड़ूँ? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि झूठ बोलने की आदत को एक दिन में पूरी तरह छोड़ देना आसान नहीं होता। यदि व्यक्ति लंबे समय से किसी परिस्थिति से बचने के लिए झूठ बोलता रहा है,

माला-1391: महाराज जी, आपको इतनी हिम्मत कहाँ से मिलती है? मैं बात-बात पर हार मान जाता हूँ!,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, आपको इतनी हिम्मत कहाँ से मिलती है? मैं बात-बात पर हार मान जाता हूँ! उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि कठिन परिस्थितियों को सहते-सहते मनुष्य के भीतर सहन करने की शक्ति पैदा होती है। जैसे किसी पहलवान को शुरुआत में एक चोट भी बहुत अधिक लगती है, लेकिन कुश्ती का अभ्यास करते-करते

माला-1389: क्या शरणागत को भगवान से भौतिक कामनाएँ करनी चाहिए?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, क्या शरणागत को भगवान से भौतिक कामनाएँ करनी चाहिए? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि जब कोई व्यक्ति वास्तव में भगवान की शरण में आ जाता है, तो उसके भीतर सबसे पहले भगवान के प्रति भरोसा और समर्पण आना चाहिए। शरणागति का अर्थ केवल यह नहीं है कि हम भगवान के सामने

माला-1388: हमारे संचित पाप और पुण्य खत्म हो रहे हैं, यह कैसे पता चलेगा?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,हमारे संचित पाप और पुण्य खत्म हो रहे हैं, यह कैसे पता चलेगा? उत्तर: महाराज जी बताते हैं कि जब हमारे संचित पाप-पुण्य क्षीण होने लगते हैं, तो इसका सबसे बड़ा संकेत हमारे अंदर की स्थिति में परिवर्तन के रूप में दिखाई देता है। मन पहले की तरह संसार की इच्छाओं और

माला-1379: यदि पढ़ाई में अच्छा नहीं कर पाते, तो निराश क्यों हो जाते हैं?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,यदि पढ़ाई में अच्छा नहीं कर पाते, तो निराश क्यों हो जाते हैं? उत्तर: महाराज जी कहते हैं कि पढ़ाई में अगर हम अच्छा नहीं कर पा रहे हैं, तो सबसे पहले यह देखना चाहिए कि हम अच्छा क्यों नहीं कर पा रहे हैं। बिना कारण जाने निराश होकर बैठ जाना सही

माला-1377: आलस्य और मोबाइल के अधिक उपयोग पर जीत कैसे पाई जाए?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,आलस्य और मोबाइल के अधिक उपयोग पर जीत कैसे पाई जाए? उत्तर: महाराज जी बताते हैं कि आलस्य और मोबाइल की आदत पर विजय पाने के लिए सबसे पहले अपने अभ्यास को बदलना पड़ेगा। जैसे हम अपनी नींद, भोजन और बोलने की आदत को अभ्यास से कम या ज्यादा कर सकते हैं,

माला-1359: अगर गुरु में दोष-बुद्धि हो जाए, तो क्या करें?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,अगर गुरु में दोष-बुद्धि हो जाए, तो क्या करें? उत्तर: महाराज जी के अनुसार, गुरु के प्रति दोष-बुद्धि आ जाना साधक के लिए बहुत गंभीर स्थिति है। हमें सबसे पहले अपने मन को देखना चाहिए कि कहीं हमारी अपनी अपेक्षाएँ, अहंकार या मन की कोई बात पूरी न होने के कारण तो

माला-1358: भागवत कराने की सोचते ही घर में मृत्यु क्यों होती है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,जब भी भागवत कराने की सोचते हैं, तो घर पर कोई मर जाता है। क्या करें? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी इस प्रकार के भय को एक भ्रम बताते हैं। यदि किसी परिवार में भागवत कथा का आयोजन करने की तैयारी के समय किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई, तो इसका अर्थ

माला-1352: सांसारिक सुख और सुखी होने में क्या अंतर है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,आपको अपने सद्गुरुदेव कैसे मिलें? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि सद्गुरुदेव की प्राप्ति केवल अपनी बुद्धि और प्रयास से नहीं होती, बल्कि भगवान की कृपा से होती है। महाराज जी अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि बचपन से ही उनके मन में भगवान को प्राप्त करने