माला-1324: एक सफल जीवन के लिए दिनचर्या में किन बातों का ध्यान रखें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी, अध्यात्म, कॉर्पोरेट जीवन और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? बच्चों को सही आध्यात्मिक दिशा कैसे दें? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि आधुनिक शिक्षा और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों का संतुलन ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की वास्तविक नींव है।

माला-1322: राजा अलर्क ने गृहस्थ आश्रम को विपत्तियों का वन क्यों कहा? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी, राजा अलर्क ने गृहस्थ आश्रम को विपत्तियों का वन (दावाग्नि रूपी संसार) क्यों कहा? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी समझाते हैं कि राजा अलर्क ने गृहस्थ आश्रम को दोषपूर्ण नहीं कहा, बल्कि उस अवस्था की ओर संकेत किया जिसमें जीव भगवान को भूलकर माया, देहाभिमान और अनंत इच्छाओं में उलझ जाता

माला-1321: भजन का आनंद भी भगवान से दूर कर सकता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,भजन करने के बाद जो प्रसन्नता और आनंद अनुभव होता है, उससे अहंकार आने लगे तो क्या करें? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि भजन के बाद मिलने वाली प्रसन्नता साधक के लिए अंतिम लक्ष्य नहीं है। यदि भजन के बाद मन में यह विचार आने लगे कि “मेरा भजन

माला-1312: क्या भगवत आनंद भी बंधन बन सकता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, क्या भक्ति, नाम जप और भगवत आनंद में मिलने वाला सुख भी बंधनकारी हो सकता है, या यह भगवत प्राप्ति में सहायक है? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि भक्ति, नाम जप, भगवान के रूप, गुण, लीला और धाम में जो आनंद प्राप्त होता है, वह साधारण सात्त्विक सुख नहीं है,

माला-1311: आखिर संत ईश्वर प्राप्ति को कठिन क्यों बताते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, क्या ईश्वर प्राप्ति वास्तव में कठिन है या सरल? संत-महापुरुष इसे कठिन क्यों बताते हैं? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि वास्तव में ईश्वर प्राप्ति जितनी सरल है, उतना सरल संसार में और कोई कार्य नहीं है। कठिनाई भगवान में नहीं, बल्कि हमारे मन की आसक्तियों में है। जब तक मनुष्य अपने

माला-1310: गुरु पादुका का इतना विशेष महत्व क्यों माना गया है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, गुरु पादुका का इतना विशेष महत्व क्यों माना गया है, जबकि गुरुदेव की माला, वस्त्र और अन्य वस्तुएँ भी पूजनीय हैं? उत्तर: महाराज जी ने बताया कि गुरुदेव की प्रत्येक वस्तु पूजनीय और आदरणीय होती है, क्योंकि वह गुरु के स्पर्श और कृपा से पवित्र हो जाती है। किंतु गुरु पादुका

माला-1307: बरसाना में श्रीजी को “लाडली महाराज” क्यों कहा जाता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, श्रीजी को “लाडली महाराज” क्यों कहा जाता है? क्या श्री राधा और श्रीकृष्ण वास्तव में एक ही परम तत्व हैं? उत्तर: महाराज जी ने इस प्रश्न का उत्तर अत्यंत प्रेमपूर्ण और सरल शब्दों में दिया। उन्होंने बताया कि श्री राधा और श्रीकृष्ण दो अलग-अलग सत्ता नहीं हैं, बल्कि एक ही परम

माला-1304: क्या मृत्यु के बाद अपने स्वजनों या पितरों से संपर्क किया जा सकता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,क्या मृत्यु के बाद अपने स्वजनों या पितरों से संपर्क करके उनकी मुक्ति या स्थिति के बारे में जाना जा सकता है? उत्तर: महाराज जी ने इस प्रश्न का उत्तर बहुत स्पष्ट रूप से दिया कि मृत्यु के बाद किसी स्वजन, पितर या मृत व्यक्ति से सीधे संपर्क करके उसकी स्थिति जानना

माला-1303: क्या संतान न पैदा करने का संकल्प लेना उचित है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, क्या संतान न पैदा करने का संकल्प लेना उचित है, या इसे भगवान की इच्छा पर छोड़ देना चाहिए? उत्तर: महाराज जी के अनुसार संतान के विषय में अपनी ओर से कठोर संकल्प लेना उचित नहीं है। उन्होंने समझाया कि यदि भगवान किसी जीव को हमारे घर जन्म देना चाहते हैं,

माला-1302: क्या सिर्फ ईमानदारी से परिवार चलाने से मोक्ष मिल सकता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, क्या केवल ईमानदारी से परिवार का पालन-पोषण करने से मोक्ष मिल सकता है, या भगवान का नाम जप भी आवश्यक है? उत्तर: महाराज जी ने इस प्रश्न का उत्तर बहुत स्पष्ट रूप से दिया। उन्होंने कहा कि केवल परिवार का पालन-पोषण करना, मेहमानों की सेवा करना, माता-पिता का आदर करना और