माला-2005:चित्त और विषयों को अलग कैसे किया जाए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
प्रश्न 1: गुणों और विषयों में डूबा हुआ चित्त संसार से पार होकर मुक्ति कैसे प्राप्त करे? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि चित्त का स्वभाव स्वयं में शुद्ध और वासुदेव स्वरूप है, परंतु जब वह विषयों का चिंतन करने लगता है तब वह विषयाकार प्रतीत होने लगता है। वास्तव में विषय चित्त में प्रवेश नहीं