माला-1358: भागवत कराने की सोचते ही घर में मृत्यु क्यों होती है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,जब भी भागवत कराने की सोचते हैं, तो घर पर कोई मर जाता है। क्या करें? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी इस प्रकार के भय को एक भ्रम बताते हैं। यदि किसी परिवार में भागवत कथा का आयोजन करने की तैयारी के समय किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई, तो इसका अर्थ

माला-1352: सांसारिक सुख और सुखी होने में क्या अंतर है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,आपको अपने सद्गुरुदेव कैसे मिलें? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि सद्गुरुदेव की प्राप्ति केवल अपनी बुद्धि और प्रयास से नहीं होती, बल्कि भगवान की कृपा से होती है। महाराज जी अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि बचपन से ही उनके मन में भगवान को प्राप्त करने

माला-1346: सांसारिक सुख और सुखी होने में क्या अंतर है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,सांसारिक सुख और सुखी होने में क्या अंतर है? क्या विरक्ति आवश्यक है? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि अधिकांश लोग धन, पद, प्रतिष्ठा, परिवार, शरीर के सुख और भौतिक सुविधाओं को ही सुख समझ लेते हैं। लेकिन वास्तव में ये सभी चीजें कुछ समय के लिए आनंद देती हैं।

माला-1345: हमारे अंदर श्रीजी के लिए आपके जैसा भाव कैसे आए?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1.महाराज जी, हमारे अंदर श्रीजी के लिए आपके जैसा भाव कैसे आए? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि श्रीजी के प्रति गहरा प्रेम केवल विरक्त लोगों के लिए नहीं है। गृहस्थ जीवन जीने वाला व्यक्ति भी उसी प्रेम को प्राप्त कर सकता है, यदि वह अपने जीवन की दिशा बदल दे। समस्या

माला-1335: बच्चे इस बात को ध्यान से पढ़ें।,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: बच्चे इस बात को ध्यान से पढ़ें। उत्तर: महाराज जी बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से सावधान करते हुए बताते हैं कि जीवन की सबसे बड़ी पूँजी धन, पद या आधुनिक सुविधाएँ नहीं, बल्कि चरित्र की पवित्रता है। यदि बचपन और युवावस्था में अच्छे संस्कार, संयम और मर्यादा नहीं अपनाई गई, तो

माला-1333: मैं कौन हूँ? मैं कहाँ से आया हूँ? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,मैं कौन हूँ? मैं कहाँ से आया हूँ? मैं कहाँ जा रहा हूँ? उत्तर: महाराज जी बताते हैं कि इस प्रश्न का उत्तर केवल शरीर, नाम या सांसारिक पहचान के आधार पर नहीं समझा जा सकता। वास्तविकता यह है कि मनुष्य का असली स्वरूप शरीर नहीं, बल्कि परमात्मा का स्वरूप है। आज

माला-1330: बचपन में बाबाजी बनना चाहता था, पर नहीं बन पाया। क्या यह मेरा प्रारब्ध था? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,बचपन में बाबाजी बनना चाहता था, पर नहीं बन पाया। क्या यह मेरा प्रारब्ध था? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी इस प्रश्न का उत्तर देते हुए स्पष्ट कहते हैं कि भगवत्प्राप्ति प्रारब्ध पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पुरुषार्थ और दृढ़ संकल्प पर निर्भर करती है। वे बताते हैं कि यह नहीं सोचना

माला-1327: कर्मों का फल अगले जन्म में ही क्यों भोगना पड़ता है?श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1.महाराज जी, क्या मनुष्य को अपने कर्मों का फल केवल अगले जन्म में मिलता है, या कुछ पापों का दंड इसी जन्म में भी मिल सकता है? भगवान के भजन से कर्मों का प्रभाव कैसे समाप्त होता है? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि यह मान लेना उचित नहीं है कि हर

माला-1326: भक्ति मार्ग और ज्ञान मार्ग में कौन श्रेष्ठ है?श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी, यदि किसी संत के प्रति गहरा प्रेम और लगाव हो जाए, तो क्या यह भगवान की प्राप्ति का मार्ग बन सकता है? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि यदि किसी संत के प्रति होने वाला प्रेम वास्तव में भगवान तक पहुँचाने वाला हो, तो वह साधक के लिए अत्यंत

माला-1325: लोग हमारी अच्छाई का फायदा क्यों उठाते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,यदि हमारे अच्छे व्यवहार का लोग गलत फायदा उठाएँ, तब भी क्या हमें अच्छा व्यवहार बनाए रखना चाहिए? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि किसी के साथ अच्छा व्यवहार करने का उद्देश्य सामने वाले से धन्यवाद, सम्मान या बदले में अच्छा व्यवहार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। यदि हमारा व्यवहार