माला-1395: गृहस्थ में भगवत् प्राप्ति हो सकती है, तो वैराग्य की क्या जरूरत है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,पहले संत-महात्मा गृहस्थ में भी रहकर भगवत्प्राप्ति करते थे, तो वैराग्य की क्या जरूरत है? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि वैराग्य का अर्थ केवल कपड़े उतारकर घर छोड़ देना नहीं है और गृहस्थ होने का अर्थ केवल स्त्री, परिवार और भोग में लगे रहना भी नहीं है। असली बात है आसक्ति का

माला-1394: भोजन का भजन पर क्या असर पड़ता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,आजकल लोग तली हुई चीज़ें, फास्ट फूड और बाहर का खाना बहुत पसंद करते हैं। साधक को भोजन के विषय में क्या ध्यान रखना चाहिए? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि आजकल खान-पान की आदतें ऐसी हो गई हैं कि लोगों को घर के सात्त्विक भोजन की अपेक्षा बाजार और होटल का भोजन

माला-1393: मेरे अंदर अहंकार नहीं, फिर भी लोग ऐसा क्यों समझते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,मेरे अंदर अहंकार नहीं, फिर भी लोग ऐसा क्यों समझते हैं? उत्तर:महाराज जी इस प्रश्न को बहुत गहराई से समझाते हैं। वे कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति स्वयं यह कहने लगे कि “मेरे अंदर अहंकार नहीं है”, तो यहीं से एक सूक्ष्म अहंकार दिखाई देने लगता है। क्योंकि यह अनुभव किसने

माला-1392: झूठ बोलकर बच रहे हैं या फँस रहे हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,झूठ बोलने की आदत हो गई है, अब पत्नी भी विश्वास नहीं करती। यह आदत कैसे छोड़ूँ? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि झूठ बोलने की आदत को एक दिन में पूरी तरह छोड़ देना आसान नहीं होता। यदि व्यक्ति लंबे समय से किसी परिस्थिति से बचने के लिए झूठ बोलता रहा है,

माला-1391: महाराज जी, आपको इतनी हिम्मत कहाँ से मिलती है? मैं बात-बात पर हार मान जाता हूँ!,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, आपको इतनी हिम्मत कहाँ से मिलती है? मैं बात-बात पर हार मान जाता हूँ! उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि कठिन परिस्थितियों को सहते-सहते मनुष्य के भीतर सहन करने की शक्ति पैदा होती है। जैसे किसी पहलवान को शुरुआत में एक चोट भी बहुत अधिक लगती है, लेकिन कुश्ती का अभ्यास करते-करते

माला-1389: क्या शरणागत को भगवान से भौतिक कामनाएँ करनी चाहिए?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, क्या शरणागत को भगवान से भौतिक कामनाएँ करनी चाहिए? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि जब कोई व्यक्ति वास्तव में भगवान की शरण में आ जाता है, तो उसके भीतर सबसे पहले भगवान के प्रति भरोसा और समर्पण आना चाहिए। शरणागति का अर्थ केवल यह नहीं है कि हम भगवान के सामने

माला-1388: हमारे संचित पाप और पुण्य खत्म हो रहे हैं, यह कैसे पता चलेगा?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,हमारे संचित पाप और पुण्य खत्म हो रहे हैं, यह कैसे पता चलेगा? उत्तर: महाराज जी बताते हैं कि जब हमारे संचित पाप-पुण्य क्षीण होने लगते हैं, तो इसका सबसे बड़ा संकेत हमारे अंदर की स्थिति में परिवर्तन के रूप में दिखाई देता है। मन पहले की तरह संसार की इच्छाओं और

माला-1379: यदि पढ़ाई में अच्छा नहीं कर पाते, तो निराश क्यों हो जाते हैं?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,यदि पढ़ाई में अच्छा नहीं कर पाते, तो निराश क्यों हो जाते हैं? उत्तर: महाराज जी कहते हैं कि पढ़ाई में अगर हम अच्छा नहीं कर पा रहे हैं, तो सबसे पहले यह देखना चाहिए कि हम अच्छा क्यों नहीं कर पा रहे हैं। बिना कारण जाने निराश होकर बैठ जाना सही

माला-1377: आलस्य और मोबाइल के अधिक उपयोग पर जीत कैसे पाई जाए?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,आलस्य और मोबाइल के अधिक उपयोग पर जीत कैसे पाई जाए? उत्तर: महाराज जी बताते हैं कि आलस्य और मोबाइल की आदत पर विजय पाने के लिए सबसे पहले अपने अभ्यास को बदलना पड़ेगा। जैसे हम अपनी नींद, भोजन और बोलने की आदत को अभ्यास से कम या ज्यादा कर सकते हैं,

माला-1359: अगर गुरु में दोष-बुद्धि हो जाए, तो क्या करें?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1. महाराज जी,अगर गुरु में दोष-बुद्धि हो जाए, तो क्या करें? उत्तर: महाराज जी के अनुसार, गुरु के प्रति दोष-बुद्धि आ जाना साधक के लिए बहुत गंभीर स्थिति है। हमें सबसे पहले अपने मन को देखना चाहिए कि कहीं हमारी अपनी अपेक्षाएँ, अहंकार या मन की कोई बात पूरी न होने के कारण तो