माला-1395: गृहस्थ में भगवत् प्राप्ति हो सकती है, तो वैराग्य की क्या जरूरत है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
प्रश्न 1: महाराज जी,पहले संत-महात्मा गृहस्थ में भी रहकर भगवत्प्राप्ति करते थे, तो वैराग्य की क्या जरूरत है? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि वैराग्य का अर्थ केवल कपड़े उतारकर घर छोड़ देना नहीं है और गृहस्थ होने का अर्थ केवल स्त्री, परिवार और भोग में लगे रहना भी नहीं है। असली बात है आसक्ति का