माला-1180:सभी इच्छाओं को प्रभु से जोड़कर एकरूप कैसे हों? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
प्रश्न 1: भगवान के प्रेम का अनुभव पूर्ण होता है या समर्पण के अनुसार? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान का प्रेम किसी सीमा में बंधा हुआ नहीं है। उनका प्रेम तो अनंत और सर्वव्यापक है, परंतु उस प्रेम का अनुभव साधक के भीतर उतनी ही मात्रा में प्रकट होता है जितना उसका समर्पण गहरा