माला-1209:यदि सब भगवान की संतान हैं तो काम, क्रोध और लोभ क्यों बनाए गए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
भक्ति मार्ग में आसक्ति, नाम-जप और शरणागति का रहस्य – महाराज जी के अमृत वचन मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति है। लेकिन जीवन में संबंध, आसक्ति, विकार, मोह और भ्रम साधक को बार-बार विचलित कर देते हैं। संत महापुरुष बताते हैं कि यदि साधक सही विवेक, नाम-जप और गुरु की शरण