माला-1042: गुरु तत्व का स्वरूप कैसा है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के अमृत वचनों से

महाराज जी

प्रश्न 6: गुरु तत्व का स्वरूप प्रश्न: महाराज जी, गुरु तत्व क्या है?उत्तर:गुरु तत्व का अर्थ प्रेमानंद महाराज जी की वाणी में यह है कि गुरु कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि स्वयं ब्रह्म का जीवंत रूप हैं। गुरु ही जीव को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। कभी वे प्रेम से समझाते हैं,

माला-1041: मन की बेचैनी का कारण क्या है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज के अमृत वचनों से

प्रेमानंद

❖ श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार दुख का अंत कहाँ है? – मन की स्थिति और नाम-जप की शक्ति बसंत जी (हरियाणा) ने अत्यंत मार्मिक प्रश्न पूछा कि वे जीवन से अत्यधिक दुखी हैं – दोनों किडनियाँ फेल हैं और लगता है कोई उनसे अधिक दुखी नहीं। इस पर श्री महाराज जी ने उत्तर

माला-1027: क्या नाम जप से नियति बदली जा सकती है?, श्री महाराज जी की वाणी से

प्रेमानंद जी महाराज

❖ गुरु बनाने की सही अवस्था क्या है? महाराज जी बताते हैं कि गुरु दीक्षा में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। पहले स्वयं नाम जप करो, साधना करो। जब हृदय से भगवान की प्राप्ति की लालसा जगे, तब प्रभु से प्रार्थना करो कि हे प्रभु! आप ही मेरे गुरु से मिला दो। जब भीतर परमार्थ का

माला-1026: भगवत साक्षात्कार का रहस्य संत क्यों नहीं बताते?, श्री महाराज जी की अमृत वाणी से

श्री प्रेमानंद जी महाराज

❖ बुरे कर्मों का प्रायश्चित: नाम-जप या भोगना? उत्तर:महाराज जी स्पष्ट करते हैं कि नाम-जप से संचित और वर्तमान के पापों का प्रायश्चित संभव है, लेकिन प्रारब्ध कर्मों को भोगना ही पड़ेगा। “जो प्रारब्ध बन गया है – वह भोगना ही पड़ेगा, चाहे बड़े से बड़ा संत ही क्यों न हो।” नाम-जप के बल से

माला-1025: क्या श्राद्ध, तर्पण आदि के लिए नाम जप पर्याप्त है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज की अमृत वाणी से

प्रेमानंद जी महाराज

1. निर्णय लेने पर प्रतिकूल परिणाम क्यों आते हैं? श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि यदि बुरा प्रारब्ध साथ चल रहा हो, तो चाहे कितना भी सोच-समझकर निर्णय लें, फिर भी परिणाम असफलता भरा हो सकता है। और कभी-कभी बिना सोचे समझे किया गया कार्य भी सफल हो सकता है — यदि पुण्य साथ

माला-1024: श्री प्रेमानंद जी महाराज के अमृत वचनों से जीवन के जटिल प्रश्नों के सरल उत्तर

श्री प्रेमानंद जी

1. मृत्यु का विचार – डर या भक्ति का द्वार ? श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि “मरना है” – यह वाक्य नकारात्मक नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाई की याद है। मृत्यु का स्मरण व्यक्ति को नाम-जप, अच्छे कर्म और परोपकार की ओर प्रेरित करता है। जब कोई कहे “मैं मरना चाहता हूं”, तो

माला-1023: प्रेमानंद जी महाराज के दिव्य उत्तर, नाम जप, भक्ति और सांसारिक जीवन के गूढ़ रहस्य

श्री प्रेमानंद जी महाराज

1. नाम जप में प्रेम और अनुभव कैसे जागे ? प्रेमानंद जी महाराज समझाते हैं कि नाम ही प्रेम की जड़ है। जैसे-जैसे व्यक्ति निरंतर नाम जप करता है, वैसे-वैसे प्रेम की अनुभूति हृदय में स्वतः जागृत होती है।शुरुआत में नाम जप कठिन, नीरस या कड़वा भी लग सकता है, पर यह अवस्था केवल प्रारंभिक

माला-1022: संत श्री प्रेमानंद जी महाराज ने समझाया जब लोगों पर भरोसा नहीं होता तो क्या करें?

प्रेमानंद जी महाराज

1. शहरी जीवन की भागदौड़ में शांति कैसे संभव है? उत्तर –प्रेमानंद जी महाराज स्पष्ट करते हैं कि जीवन में शांति पाने का मार्ग केवल नाम-जप है। संसार की दौड़, तनाव, और भोग-विलास से बचा नहीं जा सकता, लेकिन उसके बीच में भी यदि पल-पल राधा राधा का स्मरण हो, तो मन में स्थिरता और

माला-1021: रोग रूपी भगवान और औषधि रूपी पूजा का रहस्य संत श्री प्रेमानंद जी महाराज की वाणी से

प्रेमानंद जी महाराज

रोग रूपी भगवान और औषधि रूपी पूजा प्रश्न: जब आपकी किडनी खराब हुई और आपने दवा लेने से मना किया, तब गुरुदेव ने क्या कहा? उत्तर:प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि गुरुदेव ने कहा – “रोग रूप से भगवान आए हैं, औषधि रूप से पूजा कीजिए।”महाराज जी ने स्पष्ट किया कि यदि रोग भगवान के

माला-1020: संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के उत्तरों में छिपे दिव्य रहस्य

श्री प्रेमानंद जी महाराज

🕉️ 1. क्या हमारे सभी कर्म पूर्व निर्धारित हैं? प्रेमानंद जी महाराज स्पष्ट करते हैं कि हमारे सभी कर्म पूर्व निर्धारित नहीं होते। केवल पाप और पुण्य के फल, जिन्हें प्रारब्ध कहते हैं, वे निश्चित हो सकते हैं, लेकिन आज हम क्या सोचेंगे, क्या बोलेंगे, क्या करेंगे — यह पूरी तरह हमारे ही हाथ में