माला-1276: लोभ और कामना में क्या अंतर है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
प्रश्न 1:महाराज जी, पश्यंती वाणी से जाप एवं निर्वाणी क्रिया में क्या भेद है? उत्तर:महाराज जी ने बताया कि नाम जप की कई अवस्थाएँ होती हैं—वैखरी, उपांशु, मध्यमा, पश्यंती और परा। साधक पहले वैखरी से प्रारंभ करता है जहाँ जिह्वा से नाम लिया जाता है। फिर धीरे-धीरे उपांशु और मानसिक जप में प्रवेश होता है।