माला-1276: लोभ और कामना में क्या अंतर है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, पश्यंती वाणी से जाप एवं निर्वाणी क्रिया में क्या भेद है? उत्तर:महाराज जी ने बताया कि नाम जप की कई अवस्थाएँ होती हैं—वैखरी, उपांशु, मध्यमा, पश्यंती और परा। साधक पहले वैखरी से प्रारंभ करता है जहाँ जिह्वा से नाम लिया जाता है। फिर धीरे-धीरे उपांशु और मानसिक जप में प्रवेश होता है।

माला-1275:यदि सब कुछ प्रारब्ध से होना है, तो डॉक्टर के पास क्यों जाएं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, यदि सब कुछ प्रारब्ध से होना है, तो डॉक्टर के पास क्यों जाएं? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि प्रारब्ध को कोई टाल नहीं सकता। यदि शरीर में रोग आया है और डॉक्टर के पास जाना प्रारब्ध में लिखा है, तो मनुष्य चाहे न भी चाहे, परिस्थितियाँ उसे वहां तक ले जाएंगी।

माला-1274:मेरे निर्णय हमेशा गलत क्यों हो जाते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,मेरे निर्णय हमेशा गलत क्यों हो जाते हैं? उत्तर: महाराज जी बताते हैं कि मनुष्य केवल वर्तमान बुद्धि से निर्णय लेता है, लेकिन उसके पूर्व जन्मों के कर्म और प्रारब्ध भी परिणामों को प्रभावित करते हैं। कई बार मनुष्य बहुत सोच-समझकर कार्य करता है, फिर भी विपरीत फल मिलता है क्योंकि पूर्व

माला-1273:क्या सभी कर्मों का हिसाब इसी जन्म में पूरा हो जाता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: क्या सभी कर्मों का हिसाब इसी जन्म में पूरा हो जाता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि मनुष्य के करोड़ों जन्मों के संचित कर्म होते हैं। उनमें से कुछ कर्मों का फल इस जन्म में भोगने के लिए मिलता है, जिससे शरीर की रचना होती है। लेकिन सभी कर्म एक ही जन्म में

माला-1271:जब मन बार-बार बुराई और विषयों की ओर भागे तो क्या करें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: क्या मांसाहारी व्यक्ति को मंदिर का प्रसाद देने से पाप लगता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान का प्रसाद और चरणामृत अत्यंत पवित्र होता है। यदि कोई व्यक्ति अभी मांसाहार या अभक्ष पदार्थों का सेवन करता है, तब भी उसे श्रद्धा से प्रसाद देना चाहिए। महाराज जी कहते हैं कि भगवत प्रसाद

माला-1270:क्या आत्मा सच में होती है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,क्या आत्मा सच में होती है? उसका वास्तविक स्वरूप क्या है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि आत्मा केवल कल्पना नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का वास्तविक आधार है। मनुष्य सामान्यतः अपने शरीर को ही “मैं” मान लेता है, जबकि शरीर तो केवल एक ढांचा है। महाराज जी समझाते हैं कि हम कहते हैं—“मेरा

माला-1266:कर्म करते हुए भी निर्लिप्त कैसे रहा जाए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, “पानी में मीन प्यासी” का वास्तविक भावार्थ क्या है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि “पानी में मीन प्यासी” का अर्थ है कि जिस आनंद की खोज मनुष्य बाहर संसार में कर रहा है, वह आनंद वास्तव में उसके भीतर ही मौजूद है। जैसे मछली पानी में रहते हुए भी यदि प्यास महसूस

माला-1264:भक्ति में भाव का क्या महत्व है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, सिद्धियों और दिव्य शक्तियों के विषय में साधक का दृष्टिकोण क्या होना चाहिए? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि साधना का वास्तविक उद्देश्य भगवान की प्राप्ति और आत्मबोध है, न कि चमत्कार, सिद्धियाँ या दिव्य शक्तियाँ। साधना के मार्ग में कभी-कभी रिद्धि-सिद्धियाँ आती हैं, लेकिन यदि साधक उनके पीछे भागने लगता है तो

माला-1262: दूसरों से तुलना करना कैसे छोड़ें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, दूसरों से तुलना करना कैसे छोड़ें? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि दूसरों से तुलना करने की आदत मनुष्य को कभी संतोष नहीं लेने देती। जब हम किसी के पास गाड़ी, पैसा, पद या प्रतिष्ठा देखते हैं, तो हमें लगता है कि हम पीछे रह गए हैं। लेकिन यह दौड़ कभी समाप्त

माला-1258: कर्ता और भोक्ता भाव कैसे समाप्त होगा? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,बिना अर्थ समझे पाठ करने से क्या फल मिलता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान का नाम, शास्त्र और स्तोत्र इतने दिव्य होते हैं कि उनका प्रभाव केवल बुद्धि से समझने पर ही नहीं, बल्कि श्रद्धा से उच्चारण करने पर भी पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति रामायण, गीता, भागवत या किसी