माला-1415:क्या भक्ति-मार्ग आसान है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,क्या भक्ति-मार्ग आसान है? उत्तर: भक्ति-मार्ग को अक्सर ज्ञान-मार्ग की तुलना में सरल माना जाता है, लेकिन पूज्य महाराज जी समझाते हैं कि भगवान की सच्ची भक्ति करना भी आसान नहीं है। भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ करना या भगवान का नाम ले लेना नहीं है, बल्कि अपने मन और आचरण को

माला-1414:महाराज जी,जीवन का रहस्य क्या है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,जीवन का रहस्य क्या है? उत्तर: पूज्य महाराज जी के अनुसार, मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा रहस्य अपने वास्तविक स्वरूप को जानना है। हम वर्षों से इस शरीर में रह रहे हैं, लेकिन कभी अपने भीतर झाँककर यह जानने का प्रयास नहीं करते कि वास्तव में हम कौन हैं। हमारा अधिकांश जीवन

माला-1413:महाराज जी,कामिनी में फिसल गया, अब क्या करूँ? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,प्रेमलक्षणा भक्ति क्या होती है और इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है? उत्तर: पूज्य महाराज जी के अनुसार, प्रेमलक्षणा भक्ति भगवान के प्रति ऐसा अनन्य प्रेम है, जिसमें साधक का मन निरंतर भगवान के स्मरण में लगा रहता है। उसके हृदय में भगवान के प्रति इतना गहरा अनुराग जाग जाता है

माला-1412:महाराज जी,कामिनी में फिसल गया, अब क्या करूँ? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, लोग कहते हैं कि तू जोरू का गुलाम है। पत्नी से बहुत प्रेम करना क्या गलत है? उत्तर: पूज्य महाराज जी समझाते हैं कि पत्नी से प्रेम करना गलत नहीं है, लेकिन उस प्रेम का आधार समझना बहुत आवश्यक है। प्रेम शरीर से नहीं, बल्कि उसके भीतर विराजमान परमात्मा से होना

माला-1411:महाराज जी,कामिनी में फिसल गया, अब क्या करूँ? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

1. महाराज जी,कामिनी में फिसल गया, अब क्या करूँ? प्रश्न: कामिनी में फिसल गया, अब क्या करूँ? उत्तर:पूज्य महाराज जी ने इस स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात भगवान का आश्रय न छोड़ने की बताई है। मनुष्य से भूल हो सकती है, परिस्थितियां ऐसी आ सकती हैं कि वह अपने साधना मार्ग से विचलित हो जाए,

माला-1410:असल में मृत्यु क्या है और इससे इतना डर क्यों लगता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

1. महाराज जी,असल में मृत्यु क्या है और इससे इतना डर क्यों लगता है? प्रश्न: असल में मृत्यु क्या है और इससे इतना डर क्यों लगता है? उत्तर:पूज्य महाराज जी के अनुसार मृत्यु वास्तव में एक भ्रम है। जिस शरीर को हम अपना मान लेते हैं, उसी शरीर के छूटने को हम मृत्यु कहते हैं

माला-1409:जीवन में सब कुछ प्राप्त है, फिर भी एक तनाव और डर क्यों बना रहता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

1. प्रश्न: महाराज जी ,जीवन में सब कुछ प्राप्त है, फिर भी एक तनाव और डर क्यों बना रहता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि संसार में मनुष्य को बहुत कुछ प्राप्त हो जाने के बाद भी भीतर की अपूर्णता समाप्त नहीं होती, क्योंकि जो कुछ हमें संसार में मिला है, वह स्थायी नहीं है।

माला-1408:भगवान के नाम में कितना बल है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

1. प्रश्न: महाराज जी,भगवान के नाम में कितना बल है? नाम जप करते समय मन में सच्चा प्रेम और अनुभव कैसे जागे? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान के नाम में बहुत बड़ा बल है। नाम ही प्रेम की जड़ है। जैसे किसी वृक्ष की जड़ मिल जाए तो पूरा वृक्ष प्राप्त हो जाता है,

माला-1407:भगवान की कृपा होने पर वे सबसे दूर कर देते हैं, ऐसे में तो अकेलापन हो जाएगा? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी,भगवान की कृपा होने पर वे सबसे दूर कर देते हैं, ऐसे में तो अकेलापन हो जाएगा? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यह डर ही हमारी गलत धारणा है कि अगर भगवान की कृपा से संसार से दूरी हो गई तो हम अकेले हो जाएंगे। वास्तव में हम अभी भी अकेले ही हैं।

माला-1406:जैसे अभी सब सत्य लग रहा है, पर सब झूठ है, तो भगवद्-प्राप्ति सत्य है यह कैसे पता चलेगा? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

① महाराज जी,जैसे अभी सब सत्य लग रहा है, पर सब झूठ है, तो भगवद्-प्राप्ति सत्य है यह कैसे पता चलेगा? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि स्वप्न में जो कुछ दिखाई देता है, उस समय वह बिल्कुल सत्य लगता है। स्वप्न में शरीर भी होता है, सुख-दुख भी अनुभव होते हैं और भूख-प्यास भी वास्तविक