माला-1264:भक्ति में भाव का क्या महत्व है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, सिद्धियों और दिव्य शक्तियों के विषय में साधक का दृष्टिकोण क्या होना चाहिए? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि साधना का वास्तविक उद्देश्य भगवान की प्राप्ति और आत्मबोध है, न कि चमत्कार, सिद्धियाँ या दिव्य शक्तियाँ। साधना के मार्ग में कभी-कभी रिद्धि-सिद्धियाँ आती हैं, लेकिन यदि साधक उनके पीछे भागने लगता है तो

माला-1262: दूसरों से तुलना करना कैसे छोड़ें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, दूसरों से तुलना करना कैसे छोड़ें? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि दूसरों से तुलना करने की आदत मनुष्य को कभी संतोष नहीं लेने देती। जब हम किसी के पास गाड़ी, पैसा, पद या प्रतिष्ठा देखते हैं, तो हमें लगता है कि हम पीछे रह गए हैं। लेकिन यह दौड़ कभी समाप्त

माला-1258: कर्ता और भोक्ता भाव कैसे समाप्त होगा? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,बिना अर्थ समझे पाठ करने से क्या फल मिलता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान का नाम, शास्त्र और स्तोत्र इतने दिव्य होते हैं कि उनका प्रभाव केवल बुद्धि से समझने पर ही नहीं, बल्कि श्रद्धा से उच्चारण करने पर भी पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति रामायण, गीता, भागवत या किसी

माला-1255: जीवन में महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय निर्भय कैसे रहें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, जीवन में महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय निर्भय कैसे रहें? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि निर्णय के समय जो भय उत्पन्न होता है, उसका मूल कारण है—असुरक्षा और भविष्य की चिंता। मनुष्य सोचता है कि यदि निर्णय गलत हो गया तो क्या होगा, इसलिए वह डर जाता है। लेकिन जो व्यक्ति भगवान

माला-1252: “आपके बनाए बनेगी” का क्या अर्थ है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,सिद्ध पुरुष भी नाम-जप क्यों करते हैं? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि सिद्ध पुरुषों के लिए नाम-जप कोई साधन नहीं, बल्कि उनका स्वभाव बन जाता है। जीवन भर भगवान की लीला कथा सुनते-सुनते और नाम-जप करते-करते उनके भीतर ऐसा प्रेम उत्पन्न हो जाता है कि वह एक प्रकार का “आनंदमय व्यसन” बन

माला-1250: नाम में रुचि कैसे आए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न1: महाराज जी,नाम में रुचि कैसे आए? उत्तर:महाराज जी, के अनुसार नाम में रुचि अचानक नहीं आती, बल्कि यह धीरे-धीरे साधना से प्रकट होती है। प्रारंभ में साधक को नाम-जप बोझ जैसा लगता है, क्योंकि हृदय में पाप और वासनाएँ भरी होती हैं। जब तक अंतःकरण अशुद्ध है, तब तक भगवान के नाम में स्वाद

माला-1248: समाज में व्यसन और पतन को कैसे रोका जाए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1:महाराज जी, संसार रूपी भवसागर से सबसे सरल, सर्वोपरि और सर्वसुलभ तरीके से जीव अपना कल्याण कैसे कर सकता है? उत्तर:महाराज जी स्पष्ट कहते हैं कि इस संसार रूपी भवसागर से पार होने का सबसे सरल, सहज और सर्वोपरि उपाय केवल भगवान का नाम-जप है। इसमें किसी विशेष विधि-विधान, समय या शुद्ध-अशुद्ध की बाध्यता

माला-1246: ब्रह्मचर्य का क्या महत्व है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी,मन इतना कमजोर क्यों हो जाता है और इसे कैसे संभालें? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि जब मनुष्य का मन विषयों, विकारों और गलत आचरण में उलझ जाता है, तब उसकी आंतरिक शक्ति कमजोर होने लगती है। मन की यह दुर्बलता ही उसे टूटने जैसा अनुभव कराती है। वास्तव में समस्या बाहर

माला-1245: भगवान को पहचान क्यों नहीं पाते? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, गलत कार्य (झूठी गवाही आदि) का प्रायश्चित कैसे करें? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि जब मनुष्य से कोई गलत कार्य हो जाता है—चाहे वह झूठ बोलना हो, किसी को हानि पहुँचाना हो या अन्य कोई पाप—तो उसका प्रभाव केवल बाहरी नहीं बल्कि भीतर भी जलन और अशांति के रूप में दिखाई

माला-1244: परिवार से प्रेम करते हुए मोह से कैसे बचें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, प्रभु की प्रेरणा और मन की वासना में अंतर कैसे समझें? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि मन में उठने वाले विचार दो प्रकार के होते हैं—एक शास्त्र सम्मत और दूसरा शास्त्र विरुद्ध। जो विचार शास्त्रों के अनुकूल हों, वे भगवत प्रेरणा होते हैं और जो शास्त्रों के विरुद्ध हों, वे मन