माला-1051: “मेरी लाड़ली” की ठसक हृदय में कैसे आए?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप
प्रश्न 1: महाराज जी, लंबे समय से नाम जप के प्रयास करते-करते थक गया हूँ। भजन में उत्साह क्यों नहीं रह गया? कभी लगता है सब पहले से निर्धारित है और कभी लगता है कि हम ही सब कुछ कर रहे हैं। यह स्थिति क्यों आती है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं — यह थकावट आत्मिक