माला-1018: संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के उत्तरों में छिपे दिव्य रहस्य
धन आने पर भी प्रसन्नता नहीं रहती क्योंकि सच्चा आनंद धन, पद या भोग में नहीं, भगवान के नाम और सेवा में है। प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि बाहर की चीज़ें क्षणिक तृप्ति देती हैं, लेकिन मन को स्थायी शांति नहीं मिलती। जब मन परमात्मा से जुड़ता है और धन परोपकार में लगता है,