माला-1057: जब कोई व्यक्ति हम पर गुस्सा करता है, श्री प्रेमानंद जी महाराज के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद जी महाराज

प्रश्न 1: जब कोई व्यक्ति हम पर गुस्सा करता है या अपशब्द कहता है तो क्या वह हमारा ही कर्म है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज समझाते हैं कि संसार में जो कुछ हमारे साथ घटता है, वह सब हमारे पूर्वजन्मों के कर्मों का फल होता है। कोई व्यक्ति जब हमें अपमानित करता है या गुस्सा

माला-1056:क्या किस्मत जैसा सच में कुछ होता है?, श्री Premanand Maharaj Ji के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

Premanand Maharaj Ji

प्रश्न 1: क्या किस्मत जैसा सच में कुछ होता है? क्या हमारी किस्मत हमारे ही हाथों में होती है? उत्तर:Premanand Maharaj Ji बताते हैं कि किस्मत कोई कल्पना नहीं, बल्कि हमारे कर्मों का प्रतिफल है। जीवन में जो कुछ घटता है, वह हमारे पूर्व जन्मों और वर्तमान कर्मों के अनुसार ही होता है। मनुष्य सोचता

माला-1055: क्या भगवान से सांसारिक वस्तुएँ माँगना उचित है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद जी महाराज

प्रश्न 1: भक्ति करते समय मन में भय और संशय क्यों आते हैं, और उन्हें कैसे दूर किया जाए? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं — जब तक हमारी सच्ची शरणागति पुष्ट नहीं होती, तब तक मन में भय और संशय बने रहते हैं। जब हम भगवान की शरण में हैं, तो भय का कोई

माला-1054: भजन करते समय गंदे विचार क्यों आते हैं ?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: भजन करते समय गंदे विचार क्यों आते हैं? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी समझाते हैं — “जब साधक भजन करता है और मन में गंदे विचार आने लगते हैं, तो घबराना नहीं चाहिए। ये विचार गंदे नहीं हैं, ये तुम्हारे भीतर की गंदगी है जो अब बाहर निकल रही है।” महाराज जी कहते हैं

माला-1053: भक्ति का सबसे शुद्ध रूप क्या है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 7: महाराज जी, भक्ति का सबसे शुद्ध रूप क्या है? उत्तर:प्रेमानंद महाराज जी बहुत सरलता से बताते हैं कि भक्ति का सबसे शुद्ध और वास्तविक रूप नाम-जप है। वे कहते हैं कि लोग अक्सर भक्ति को आँसुओं से जोड़ते हैं — जब आँसू बहते हैं तो लगता है कि प्रेम प्रकट हो गया। लेकिन

माला-1052: तुलना और ईर्ष्या से भटकते हुए मन को शांत कैसे करें?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

नाम जप

प्रश्न 1: गृहस्थ जीवन में अनेक जिम्मेदारियों के बीच भगवत् प्राप्ति का सरल मार्ग क्या है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं — “नाम जप सबसे सरल, सुलभ और निष्कपट मार्ग है।”नाम जप में न कोई धन लगता है, न पवित्रता–अपवित्रता का भेद रहता है।जैसी भी अवस्था हो — रसोई में, सेवा करते हुए, सोते-जागते —हर समय

माला-1051: “मेरी लाड़ली” की ठसक हृदय में कैसे आए?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप

नाम जप

प्रश्न 1: महाराज जी, लंबे समय से नाम जप के प्रयास करते-करते थक गया हूँ। भजन में उत्साह क्यों नहीं रह गया? कभी लगता है सब पहले से निर्धारित है और कभी लगता है कि हम ही सब कुछ कर रहे हैं। यह स्थिति क्यों आती है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं — यह थकावट आत्मिक

माला-1050: साँप का रहस्य: पाप या प्रभु की कृपा?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, मेरे परिवार में किसी को नहीं बल्कि मुझे ही साँप दिखाई देता है। क्या यह मेरे पिछले जन्मों का पाप है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यह कोई पाप की बात नहीं है। यदि तुम्हें साँप दिखाई देता है और दूसरों को नहीं दिखाई देता, तो यह तुम्हारे देखने की दृष्टि

माला-1049: क्या यह भाग्य में लिखा था या राधा नाम संकीर्तन से भाग्य बदला है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से

प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, आप जो लोगों को सही मार्ग दिखा रहे हैं, क्या यह आपके भाग्य में लिखा था या राधा नाम संकीर्तन से भाग्य बदला है? उत्तर:प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि यह सब हमारे भाग्य में नहीं लिखा था, बल्कि यह भगवान की कृपा से हो रहा है। उन्होंने न व्याकरण पढ़ा,

माला-1048: नींद बहुत आती है, भजन में मन नहीं लग पाता?, समाधान जाने ,श्री प्रेमानन्द महाराज जी के अमृत वचनों से

प्रेमानंद महाराज

🙋🏻‍♀️ प्रश्न 1: मन बहुत अशांत रहता है, क्या करें? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यदि मन को शांति देनी है, तो उसे भगवान में लगाओ। मन को संसार में लगाओगे तो अशांति, और भगवान में लगाओगे तो शांति मिलेगी। शांति पाने का सबसे सरल उपाय है — नाम जप। बार-बार भगवान का नाम लो,