माला-1190:मन पूर्ण समर्पण से क्यों डरता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, जब आप नौजवान अवस्था में साधना कर रहे थे, तब आपकी सुबह से शाम तक की दिनचर्या क्या थी? उत्तर (महाराज जी की वाणी के अनुसार) देखो, उस समय जीवन बिल्कुल साधना प्रधान था। क्रिया प्रधान नहीं, चिंतन प्रधान। रात्रि के लगभग 1 बजे उठना होता था। 1 बजे से 4

माला-1189:आत्मज्ञान के बाद ‘मैं’ समाप्त हो जाता है या रहता है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी की साधना-कालीन डायरी का सबसे महत्वपूर्ण सार क्या था? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि उनकी पूरी साधना-यात्रा का सार एक ही बात में समाहित है—मनुष्य को निरंतर भगवान की स्मृति में स्थित रहना चाहिए। विभिन्न सिद्ध महापुरुषों से जो वचन प्राप्त हुए, वे सब इसी दिशा में ले जाने वाले थे

माला-1188:“जिसमें तेरी रज़ा है उसी में राज़ी” यह भाव स्थायी कैसे बने? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: राम-नाम जप करने पर भी लौकिक धन-समृद्धि क्यों नहीं मिलती? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि भगवान का नाम किसी सांसारिक सौदे की वस्तु नहीं है। नाम का उद्देश्य धन, पद या सुविधा दिलाना नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर की दरिद्रता को मिटाना है। बाहरी धन सीमित है और नश्वर भी है, पर नाम

माला-1186:भक्ति करते-करते “मैं कुछ बन गया हूँ” ऐसा अहंकार क्यों आता है और इससे कैसे बचें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: भक्ति करते-करते “मैं कुछ बन गया हूँ” ऐसा अहंकार क्यों आता है और इससे कैसे बचें? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि साधना के मार्ग में यह एक अत्यंत सूक्ष्म और खतरनाक मोड़ होता है। प्रारम्भ में साधक स्वयं को दोषपूर्ण देखता है, इसलिए विनम्रता रहती है। लेकिन जब जप बढ़ता है, नियम बनने

माला-1185:भगवान को अपना मानकर संसार में व्यवहार कैसे करें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: राधा बाबा और भाई जी महाराज के मिलन से प्रेम-भक्ति का जो दिव्य परिवर्तन हुआ, वह भक्ति-रस क्या है और कैसे मिलता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि यह कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि अनेक जन्मों की साधना, पवित्रता और आंतरिक पात्रता का फल था। भगवान की कृपा सर्वत्र उपलब्ध रहती है,

माला-1180:सभी इच्छाओं को प्रभु से जोड़कर एकरूप कैसे हों? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: भगवान के प्रेम का अनुभव पूर्ण होता है या समर्पण के अनुसार? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान का प्रेम किसी सीमा में बंधा हुआ नहीं है। उनका प्रेम तो अनंत और सर्वव्यापक है, परंतु उस प्रेम का अनुभव साधक के भीतर उतनी ही मात्रा में प्रकट होता है जितना उसका समर्पण गहरा

माला-1177: कौन-सी एक बात भगवत-प्राप्ति करा देती है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: संत मार्ग से भगवत-प्राप्ति होती है तो गृहस्थ जीवन की क्या आवश्यकता है? क्या केवल कपड़ा बदलने से भगवान मिल जाते हैं? सच्चे संत के लक्षण क्या हैं? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि भगवान की प्राप्ति का संबंध बाहरी स्थिति से नहीं, बल्कि भीतर की भावना से है। गृहस्थ जीवन बाधा नहीं है;

माला-1176: गृहस्थ जीवन निभाते हुए भक्ति का संतुलन कैसे बनाए रखें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: साधना के मार्ग में बार-बार थकान और निराशा क्यों आती है? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि साधना का मार्ग वास्तव में भीतर का युद्ध है। काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे संस्कार साधक को बार-बार नीचे खींचते हैं, इसलिए कभी-कभी मन थका हुआ अनुभव करता है। परंतु सच्चाई यह है कि जो साधक

माला-1174: भगवत-प्राप्त महापुरुष को कैसे पहचाना जाए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: “आप इतने क्यूट कैसे हैं?”—संतों के आकर्षण का वास्तविक कारण क्या है? उत्तर:महाराज जी इस प्रश्न को हँसी में लेते हुए एक गहरी बात समझाते हैं। वे कहते हैं—सुंदरता संत की नहीं, इष्ट की होती है। वास्तविक सुंदरता श्रीजी और लाडली जी की है। संत तो उनके चरणों के दास होते हैं। जब

माला-1173: क्या माया वास्तव में माँ के समान है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, माया से बचने के उपाय बताते समय आप कहते हैं कि बाधा माया नहीं, हमारी वासनाएँ हैं। इसका सही अर्थ क्या है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज बहुत स्पष्ट करते हैं कि माया अपने आप में बाधक नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब मनुष्य वासना का शासन नहीं कर पाता।