माला-1165:प्रेम और मोह में अंतर कैसे समझें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: अतीत की गलतियाँ, अपराधबोध और भय नाम-जप में बाधा बनते हैं, इससे मुक्त कैसे हों? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि जब तक हृदय पूरी तरह पवित्र नहीं होता, तब तक पुराने कर्म और संस्कार वासना बनकर सामने आते रहते हैं। यह इस जन्म के भी हो सकते हैं और पूर्व जन्मों

माला-1164:माया का सबसे सूक्ष्म रूप क्या है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद

प्रश्न : माया का सबसे सूक्ष्म रूप क्या है? उत्तर श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार माया का सबसे सूक्ष्म और गहरा रूप मन है। सामान्यतः लोग माया को धन, परिवार, भोग या संसार से जोड़कर देखते हैं, पर महाराज जी स्पष्ट करते हैं कि असली माया बाहर नहीं, भीतर है। जब तक मन में

माला-1163:गुरु-अपराध क्या है और इससे कैसे बचें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद

प्रश्न 1: ऐसी कौन-सी तपस्या करूँ कि सारी सिद्धियाँ मेरे वश में आ जाएँ? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज स्पष्ट करते हैं कि सृष्टि के क्रम को बदल देना, सूर्य को रोक देना या अपनी इच्छा से प्रकृति को चलाना—यह सामर्थ्य केवल भगवान में है, किसी साधक या महात्मा में नहीं। आज तक जितने भी बड़े

माला-1162: अत्यंत शीघ्र भगवत प्राप्ति का कोई उपाय है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद

प्रश्न 1: अत्यंत शीघ्र भगवत प्राप्ति का कोई उपाय है? रोना कैसे आए? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि भगवत प्राप्ति का मार्ग किसी बाहरी उपाय से नहीं, बल्कि भीतर की विकलता से खुलता है। जब तक मनुष्य को अपने बल, अपने पुरुषार्थ और अपनी सामर्थ्य का भरोसा रहता है, तब तक उसके भीतर

माला-1086: समाज में बढ़ती विभाजन की प्रवृत्ति को कैसे रोका जाए?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: हम जो चाहते हैं, वह ईश्वर हमें क्यों नहीं देता? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि ईश्वर कोई मनोकामना पूरी करने वाली दुकान नहीं है। वहाँ से कुछ पाने के लिए दो ही अधिकार चाहिए — या तो आप “घर वाले” हों अर्थात भगवान को अपना मानने वाले, या फिर आपके पास

माला-1082: रोग और मृत्यु के भय से मन को कैसे संभालें?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: सांसारिक सफलता और भोगों की इच्छा रखने वाले को क्या श्री जी की प्राप्ति हो सकती है? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि यदि किसी के भीतर भोगों की इच्छा है, तब भी वह अंततः भगवत प्राप्ति के मार्ग पर जा सकता है। पहले मनुष्य अपनी इच्छाओं की पूर्ति चाहता है,

माला-1078: स्वार्थ-प्रधान रिश्तों में कैसे शांत रहें?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: क्या किसी के हमारे पैर छूने से हमारा पुण्य नष्ट होता है? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि यदि किसी के पैर छूने की हमारी अंतःप्रेरणा नहीं है, तो पुण्य नष्ट नहीं होता। जब कोई श्रद्धा से प्रणाम करता है और हम उसे भगवान का अंश मानते हैं, तब यह एक भगवत्

माला-1077: जरूरत से ज्यादा सोचना बंद कैसे करें?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: क्या ऐसा संभव है कि श्रीजी मेरे लिए कोई नई सृष्टि रच दें ताकि मैं अतीत में जाकर आपका पहला शिष्य बन सकूं? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि सृष्टि अनंत है। इसके भीतर अनगिनत लोक हैं — मृत्यु लोक, अंतरिक्ष, स्वर्ग, महर्लोक, जनलोक, तपलोक और सत्यलोक तक। इस विराट रचना का

माला-1076: जरूरत से ज्यादा सोचना बंद कैसे करें?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: जरूरत से ज्यादा सोचना बंद कैसे करें? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि अधिक सोचना ही मनुष्य को डिप्रेशन की ओर ले जाता है। जब विचारों का प्रवाह अनियंत्रित हो जाता है, तो मन भारी और अस्थिर हो जाता है। इसे रोकने का उपाय केवल नाम जप है। जब हम “राधा राधा”

माला-1064: समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मार्ग क्या है?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: भगवान के दर्शन का सबसे आसान उपाय क्या है? उत्तर:प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि भगवान के दर्शन का सबसे सरल उपाय नाम-जप है। जब मनुष्य प्रेम से प्रभु का नाम जपता है, तो वह भीतर से निर्मल होने लगता है। नाम-जप केवल शब्द नहीं है, यह प्रेम का स्रोत है। जितना अधिक