माला-1052: तुलना और ईर्ष्या से भटकते हुए मन को शांत कैसे करें?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

नाम जप

प्रश्न 1: गृहस्थ जीवन में अनेक जिम्मेदारियों के बीच भगवत् प्राप्ति का सरल मार्ग क्या है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं — “नाम जप सबसे सरल, सुलभ और निष्कपट मार्ग है।”नाम जप में न कोई धन लगता है, न पवित्रता–अपवित्रता का भेद रहता है।जैसी भी अवस्था हो — रसोई में, सेवा करते हुए, सोते-जागते —हर समय

माला-1051: “मेरी लाड़ली” की ठसक हृदय में कैसे आए?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप

नाम जप

प्रश्न 1: महाराज जी, लंबे समय से नाम जप के प्रयास करते-करते थक गया हूँ। भजन में उत्साह क्यों नहीं रह गया? कभी लगता है सब पहले से निर्धारित है और कभी लगता है कि हम ही सब कुछ कर रहे हैं। यह स्थिति क्यों आती है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं — यह थकावट आत्मिक

माला-1050: साँप का रहस्य: पाप या प्रभु की कृपा?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, मेरे परिवार में किसी को नहीं बल्कि मुझे ही साँप दिखाई देता है। क्या यह मेरे पिछले जन्मों का पाप है? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यह कोई पाप की बात नहीं है। यदि तुम्हें साँप दिखाई देता है और दूसरों को नहीं दिखाई देता, तो यह तुम्हारे देखने की दृष्टि

माला-1049: क्या यह भाग्य में लिखा था या राधा नाम संकीर्तन से भाग्य बदला है?,श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से

प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, आप जो लोगों को सही मार्ग दिखा रहे हैं, क्या यह आपके भाग्य में लिखा था या राधा नाम संकीर्तन से भाग्य बदला है? उत्तर:प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि यह सब हमारे भाग्य में नहीं लिखा था, बल्कि यह भगवान की कृपा से हो रहा है। उन्होंने न व्याकरण पढ़ा,

माला-1048: नींद बहुत आती है, भजन में मन नहीं लग पाता?, समाधान जाने ,श्री प्रेमानन्द महाराज जी के अमृत वचनों से

प्रेमानंद महाराज

🙋🏻‍♀️ प्रश्न 1: मन बहुत अशांत रहता है, क्या करें? उत्तर:महाराज जी कहते हैं कि यदि मन को शांति देनी है, तो उसे भगवान में लगाओ। मन को संसार में लगाओगे तो अशांति, और भगवान में लगाओगे तो शांति मिलेगी। शांति पाने का सबसे सरल उपाय है — नाम जप। बार-बार भगवान का नाम लो,

माला-1047: सनातन धर्म का वास्तविक अर्थ क्या है ?, श्री Premanand Maharaj Ji के अमृत वचनों से

Premanand Maharaj ji

 1: पारिवारिक रिश्तों में बहुत अधिक आसक्ति है, इसे श्री जी की तरफ कैसे मोड़ें? उत्तर: Premanand Maharaj Ji कहते हैं कि यह संसारिक मोह भगवान की माया का परिणाम है, जिसमें जीव पूरी उम्र शरीर और रिश्तों के पीछे भागता रहता है। जब तक हमारा मन नाम जप में नहीं लगेगा, तब तक मोह

माला-1046: तीनों रुकावटों को पार कैसे किया?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से

प्रेमानंद महाराज

प्रश्न 1: तीनों रुकावटों को पार कैसे किया? प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि भगवत प्राप्ति के मार्ग में कंचन, कामिनी और कीर्ति ये तीन बहुत बड़ी बाधाएँ होती हैं। लेकिन जब भजन का प्रभाव जीवन में उतरने लगता है, तो यह संसार स्वयं ही मूल्यहीन लगने लगता है। महाराज जी ने कहा कि जैसे

माला-1045:भोग की इच्छा कम नहीं हो रही, क्या करें?, श्री Premanand Maharaj जी के अमृत वचनों से

Premanand Maharaj

1. भोग की इच्छा कम नहीं हो रही, क्या करें? Premanand Maharaj जी कहते हैं –“भैया, भोग की इच्छा छोड़ देने से नहीं छूटती, भजन से ही छूटती है। जब तक मन राधे-राधे में नहीं लगेगा, तब तक ये इच्छाएँ तुम्हें घेरती रहेंगी। बार-बार उठेंगी। पर तुम डरो मत, उलझो मत। बस जपो। नाम-जप ही

माला-1044: मृत्यु से इतना भय क्यों लगता है, इस डर से कैसे मुक्त हों? श्री प्रेमानन्द जी महाराज जी के अमृत वचनों से

महाराज जी

प्रश्न 1: मृत्यु से इतना भय क्यों लगता है, इस डर से कैसे मुक्त हों? उत्तर:मृत्यु का भय लगभग हर किसी को सताता है, क्योंकि मन को लगता है कि सब छूट जाएगा—शरीर, प्रियजन, सम्पत्ति। महाराज जी समझाते हैं कि यह डर केवल अज्ञानता और मोह के कारण है। जब ईश्वर का नाम-जप और सच्चा

माला-1043: स्वार्थी प्रेम को निष्काम प्रेम कैसे बनाएं?,श्री प्रेमानन्द जी महाराज जी के अमृत वचनों से

प्रेमानन्द महाराज

🙋🏻‍♀️ प्रश्न 1: स्वार्थी प्रेम को निष्काम प्रेम कैसे बनाएं? प्रेमानन्द महाराज जी उत्तर देते हैं:देखो, अगर कोई कहता है कि — “मुझे भजन में आनंद आए, मेरे दोष छूटें, मुझे भगवान की प्राप्ति हो जाए…” तो ये स्वार्थ नहीं, परमार्थ है।ऐसी भावना स्वार्थ के भीतर छुपा हुआ ईश्वर प्रेम है।महाराज जी कहते हैं —