माला-1176: गृहस्थ जीवन निभाते हुए भक्ति का संतुलन कैसे बनाए रखें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा
प्रश्न 1: साधना के मार्ग में बार-बार थकान और निराशा क्यों आती है? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि साधना का मार्ग वास्तव में भीतर का युद्ध है। काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे संस्कार साधक को बार-बार नीचे खींचते हैं, इसलिए कभी-कभी मन थका हुआ अनुभव करता है। परंतु सच्चाई यह है कि जो साधक