माला-1185:भगवान को अपना मानकर संसार में व्यवहार कैसे करें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: राधा बाबा और भाई जी महाराज के मिलन से प्रेम-भक्ति का जो दिव्य परिवर्तन हुआ, वह भक्ति-रस क्या है और कैसे मिलता है? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि यह कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि अनेक जन्मों की साधना, पवित्रता और आंतरिक पात्रता का फल था। भगवान की कृपा सर्वत्र उपलब्ध रहती है,

माला-1180:सभी इच्छाओं को प्रभु से जोड़कर एकरूप कैसे हों? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: भगवान के प्रेम का अनुभव पूर्ण होता है या समर्पण के अनुसार? उत्तर:महाराज जी बताते हैं कि भगवान का प्रेम किसी सीमा में बंधा हुआ नहीं है। उनका प्रेम तो अनंत और सर्वव्यापक है, परंतु उस प्रेम का अनुभव साधक के भीतर उतनी ही मात्रा में प्रकट होता है जितना उसका समर्पण गहरा

माला-1177: कौन-सी एक बात भगवत-प्राप्ति करा देती है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: संत मार्ग से भगवत-प्राप्ति होती है तो गृहस्थ जीवन की क्या आवश्यकता है? क्या केवल कपड़ा बदलने से भगवान मिल जाते हैं? सच्चे संत के लक्षण क्या हैं? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि भगवान की प्राप्ति का संबंध बाहरी स्थिति से नहीं, बल्कि भीतर की भावना से है। गृहस्थ जीवन बाधा नहीं है;

माला-1176: गृहस्थ जीवन निभाते हुए भक्ति का संतुलन कैसे बनाए रखें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: साधना के मार्ग में बार-बार थकान और निराशा क्यों आती है? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि साधना का मार्ग वास्तव में भीतर का युद्ध है। काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे संस्कार साधक को बार-बार नीचे खींचते हैं, इसलिए कभी-कभी मन थका हुआ अनुभव करता है। परंतु सच्चाई यह है कि जो साधक

माला-1174: भगवत-प्राप्त महापुरुष को कैसे पहचाना जाए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: “आप इतने क्यूट कैसे हैं?”—संतों के आकर्षण का वास्तविक कारण क्या है? उत्तर:महाराज जी इस प्रश्न को हँसी में लेते हुए एक गहरी बात समझाते हैं। वे कहते हैं—सुंदरता संत की नहीं, इष्ट की होती है। वास्तविक सुंदरता श्रीजी और लाडली जी की है। संत तो उनके चरणों के दास होते हैं। जब

माला-1173: क्या माया वास्तव में माँ के समान है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, माया से बचने के उपाय बताते समय आप कहते हैं कि बाधा माया नहीं, हमारी वासनाएँ हैं। इसका सही अर्थ क्या है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज बहुत स्पष्ट करते हैं कि माया अपने आप में बाधक नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब मनुष्य वासना का शासन नहीं कर पाता।

माला-1172: आत्म-साक्षात्कार क्या है ? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: सहचरी भाव के लिए बाहरी वेश–भूषा (जटा, बाल, दाढ़ी) कितनी आवश्यक है? उत्तर:महाराज जी इस प्रश्न पर बहुत सहज और स्पष्ट भाव से उत्तर देते हैं। वे कहते हैं कि भक्ति का संबंध अंतर से है, बाहरी वेश से नहीं। कोई जटा रखे, कोई न रखे—इससे सहचरी भाव न आता है और न

माला-1171:क्या ज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग एक साथ चल सकते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: व्रत, उपवास और संयम क्या शरणागति में बाधा बनते हैं? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि व्रत और उपवास का उद्देश्य मन को संयम में लाना है, मन को पवित्र बनाना है। यह साधना की प्रारंभिक अवस्था में सहायक होते हैं, लेकिन इनका कोई अंतिम या विशेष महत्व नहीं है।महाराज जी स्पष्ट

माला-1167:भगवत साक्षात्कार से पहले कोई विशेष लक्षण या अवस्था आती है क्या? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: पति के भजन का आधा फल पत्नी को मिलने का वास्तविक अर्थ क्या है? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी इस विषय को बहुत स्पष्ट और व्यावहारिक रूप से समझाते हैं। वे कहते हैं कि “आधा फल” मिलने की बात कोई गणितीय या यांत्रिक नियम नहीं है। यह धर्म, भाव और आचरण पर आधारित है।

माला-1166:पूर्व संस्कार और आदतें कैसे बदलती हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

1. पूर्व संस्कार और आदतें कैसे बदलती हैं उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि मनुष्य की पुरानी प्रवृत्तियाँ भगवान के नाम-जप से ही बदलती हैं। नाम में इतनी सामर्थ है कि वह पूर्व पापों और पूर्व संस्कारों को नष्ट कर देता है। जिनकी प्रवृत्ति घोर पतन की थी, वे भी भगवान के नाम के