माला-1047: सनातन धर्म का वास्तविक अर्थ क्या है ?, श्री Premanand Maharaj Ji के अमृत वचनों से

Premanand Maharaj ji

 1: पारिवारिक रिश्तों में बहुत अधिक आसक्ति है, इसे श्री जी की तरफ कैसे मोड़ें? उत्तर: Premanand Maharaj Ji कहते हैं कि यह संसारिक मोह भगवान की माया का परिणाम है, जिसमें जीव पूरी उम्र शरीर और रिश्तों के पीछे भागता रहता है। जब तक हमारा मन नाम जप में नहीं लगेगा, तब तक मोह

माला-1046: तीनों रुकावटों को पार कैसे किया?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से

प्रेमानंद महाराज

प्रश्न 1: तीनों रुकावटों को पार कैसे किया? प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि भगवत प्राप्ति के मार्ग में कंचन, कामिनी और कीर्ति ये तीन बहुत बड़ी बाधाएँ होती हैं। लेकिन जब भजन का प्रभाव जीवन में उतरने लगता है, तो यह संसार स्वयं ही मूल्यहीन लगने लगता है। महाराज जी ने कहा कि जैसे

माला-1045:भोग की इच्छा कम नहीं हो रही, क्या करें?, श्री Premanand Maharaj जी के अमृत वचनों से

Premanand Maharaj

1. भोग की इच्छा कम नहीं हो रही, क्या करें? Premanand Maharaj जी कहते हैं –“भैया, भोग की इच्छा छोड़ देने से नहीं छूटती, भजन से ही छूटती है। जब तक मन राधे-राधे में नहीं लगेगा, तब तक ये इच्छाएँ तुम्हें घेरती रहेंगी। बार-बार उठेंगी। पर तुम डरो मत, उलझो मत। बस जपो। नाम-जप ही

माला-1044: मृत्यु से इतना भय क्यों लगता है, इस डर से कैसे मुक्त हों? श्री प्रेमानन्द जी महाराज जी के अमृत वचनों से

महाराज जी

प्रश्न 1: मृत्यु से इतना भय क्यों लगता है, इस डर से कैसे मुक्त हों? उत्तर:मृत्यु का भय लगभग हर किसी को सताता है, क्योंकि मन को लगता है कि सब छूट जाएगा—शरीर, प्रियजन, सम्पत्ति। महाराज जी समझाते हैं कि यह डर केवल अज्ञानता और मोह के कारण है। जब ईश्वर का नाम-जप और सच्चा

माला-1043: स्वार्थी प्रेम को निष्काम प्रेम कैसे बनाएं?,श्री प्रेमानन्द जी महाराज जी के अमृत वचनों से

प्रेमानन्द महाराज

🙋🏻‍♀️ प्रश्न 1: स्वार्थी प्रेम को निष्काम प्रेम कैसे बनाएं? प्रेमानन्द महाराज जी उत्तर देते हैं:देखो, अगर कोई कहता है कि — “मुझे भजन में आनंद आए, मेरे दोष छूटें, मुझे भगवान की प्राप्ति हो जाए…” तो ये स्वार्थ नहीं, परमार्थ है।ऐसी भावना स्वार्थ के भीतर छुपा हुआ ईश्वर प्रेम है।महाराज जी कहते हैं —

माला-1042: गुरु तत्व का स्वरूप कैसा है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के अमृत वचनों से

महाराज जी

प्रश्न 6: गुरु तत्व का स्वरूप प्रश्न: महाराज जी, गुरु तत्व क्या है?उत्तर:गुरु तत्व का अर्थ प्रेमानंद महाराज जी की वाणी में यह है कि गुरु कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि स्वयं ब्रह्म का जीवंत रूप हैं। गुरु ही जीव को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। कभी वे प्रेम से समझाते हैं,

माला-1041: मन की बेचैनी का कारण क्या है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज के अमृत वचनों से

प्रेमानंद

❖ श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार दुख का अंत कहाँ है? – मन की स्थिति और नाम-जप की शक्ति बसंत जी (हरियाणा) ने अत्यंत मार्मिक प्रश्न पूछा कि वे जीवन से अत्यधिक दुखी हैं – दोनों किडनियाँ फेल हैं और लगता है कोई उनसे अधिक दुखी नहीं। इस पर श्री महाराज जी ने उत्तर

माला-1027: क्या नाम जप से नियति बदली जा सकती है?, श्री महाराज जी की वाणी से

प्रेमानंद जी महाराज

❖ गुरु बनाने की सही अवस्था क्या है? महाराज जी बताते हैं कि गुरु दीक्षा में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। पहले स्वयं नाम जप करो, साधना करो। जब हृदय से भगवान की प्राप्ति की लालसा जगे, तब प्रभु से प्रार्थना करो कि हे प्रभु! आप ही मेरे गुरु से मिला दो। जब भीतर परमार्थ का

माला-1026: भगवत साक्षात्कार का रहस्य संत क्यों नहीं बताते?, श्री महाराज जी की अमृत वाणी से

श्री प्रेमानंद जी महाराज

❖ बुरे कर्मों का प्रायश्चित: नाम-जप या भोगना? उत्तर:महाराज जी स्पष्ट करते हैं कि नाम-जप से संचित और वर्तमान के पापों का प्रायश्चित संभव है, लेकिन प्रारब्ध कर्मों को भोगना ही पड़ेगा। “जो प्रारब्ध बन गया है – वह भोगना ही पड़ेगा, चाहे बड़े से बड़ा संत ही क्यों न हो।” नाम-जप के बल से

माला-1025: क्या श्राद्ध, तर्पण आदि के लिए नाम जप पर्याप्त है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज की अमृत वाणी से

प्रेमानंद जी महाराज

1. निर्णय लेने पर प्रतिकूल परिणाम क्यों आते हैं? श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि यदि बुरा प्रारब्ध साथ चल रहा हो, तो चाहे कितना भी सोच-समझकर निर्णय लें, फिर भी परिणाम असफलता भरा हो सकता है। और कभी-कभी बिना सोचे समझे किया गया कार्य भी सफल हो सकता है — यदि पुण्य साथ