माला-1026: भगवत साक्षात्कार का रहस्य संत क्यों नहीं बताते?, श्री महाराज जी की अमृत वाणी से
❖ बुरे कर्मों का प्रायश्चित: नाम-जप या भोगना? उत्तर:महाराज जी स्पष्ट करते हैं कि नाम-जप से संचित और वर्तमान के पापों का प्रायश्चित संभव है, लेकिन प्रारब्ध कर्मों को भोगना ही पड़ेगा। “जो प्रारब्ध बन गया है – वह भोगना ही पड़ेगा, चाहे बड़े से बड़ा संत ही क्यों न हो।” नाम-जप के बल से