माला-1047: सनातन धर्म का वास्तविक अर्थ क्या है ?, श्री Premanand Maharaj Ji के अमृत वचनों से
1: पारिवारिक रिश्तों में बहुत अधिक आसक्ति है, इसे श्री जी की तरफ कैसे मोड़ें? उत्तर: Premanand Maharaj Ji कहते हैं कि यह संसारिक मोह भगवान की माया का परिणाम है, जिसमें जीव पूरी उम्र शरीर और रिश्तों के पीछे भागता रहता है। जब तक हमारा मन नाम जप में नहीं लगेगा, तब तक मोह