माला-1086: समाज में बढ़ती विभाजन की प्रवृत्ति को कैसे रोका जाए?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: हम जो चाहते हैं, वह ईश्वर हमें क्यों नहीं देता? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि ईश्वर कोई मनोकामना पूरी करने वाली दुकान नहीं है। वहाँ से कुछ पाने के लिए दो ही अधिकार चाहिए — या तो आप “घर वाले” हों अर्थात भगवान को अपना मानने वाले, या फिर आपके पास

माला-1082: रोग और मृत्यु के भय से मन को कैसे संभालें?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: सांसारिक सफलता और भोगों की इच्छा रखने वाले को क्या श्री जी की प्राप्ति हो सकती है? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि यदि किसी के भीतर भोगों की इच्छा है, तब भी वह अंततः भगवत प्राप्ति के मार्ग पर जा सकता है। पहले मनुष्य अपनी इच्छाओं की पूर्ति चाहता है,

माला-1078: स्वार्थ-प्रधान रिश्तों में कैसे शांत रहें?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: क्या किसी के हमारे पैर छूने से हमारा पुण्य नष्ट होता है? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि यदि किसी के पैर छूने की हमारी अंतःप्रेरणा नहीं है, तो पुण्य नष्ट नहीं होता। जब कोई श्रद्धा से प्रणाम करता है और हम उसे भगवान का अंश मानते हैं, तब यह एक भगवत्

माला-1077: जरूरत से ज्यादा सोचना बंद कैसे करें?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: क्या ऐसा संभव है कि श्रीजी मेरे लिए कोई नई सृष्टि रच दें ताकि मैं अतीत में जाकर आपका पहला शिष्य बन सकूं? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि सृष्टि अनंत है। इसके भीतर अनगिनत लोक हैं — मृत्यु लोक, अंतरिक्ष, स्वर्ग, महर्लोक, जनलोक, तपलोक और सत्यलोक तक। इस विराट रचना का

माला-1076: जरूरत से ज्यादा सोचना बंद कैसे करें?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: जरूरत से ज्यादा सोचना बंद कैसे करें? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि अधिक सोचना ही मनुष्य को डिप्रेशन की ओर ले जाता है। जब विचारों का प्रवाह अनियंत्रित हो जाता है, तो मन भारी और अस्थिर हो जाता है। इसे रोकने का उपाय केवल नाम जप है। जब हम “राधा राधा”

माला-1064: समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मार्ग क्या है?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: भगवान के दर्शन का सबसे आसान उपाय क्या है? उत्तर:प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि भगवान के दर्शन का सबसे सरल उपाय नाम-जप है। जब मनुष्य प्रेम से प्रभु का नाम जपता है, तो वह भीतर से निर्मल होने लगता है। नाम-जप केवल शब्द नहीं है, यह प्रेम का स्रोत है। जितना अधिक

माला-1063: क्या बिना ब्रह्मज्ञान के “अहम् ब्रह्मास्मि” कहा जा सकता है?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: नाम जप करते समय राधा जी के स्वरूप का चिंतन करें या केवल राधा नाम का? उत्तर: श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि राधा जी का स्वरूप मनुष्य की साधारण दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। यह स्वरूप माया की सीमा से परे है, इसलिए सामान्य आंखों से उसका दर्शन असंभव है।

माला-1062: नाम में अनन्यता कैसे प्राप्त की जा सकती है?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: भगवत प्राप्ति के समय आप ज्ञान मार्ग में थे या भक्ति मार्ग में? उत्तर:प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि भगवत प्राप्ति किसी एक मार्ग से नहीं होती — यह गुरु कृपा से होती है। जब हम भगवान का भजन करते हैं, वही भक्ति कहलाती है; भजन से जो ज्ञान उत्पन्न होता है, वह

माला-1061: सबसे उत्तम मंत्र कौन-सा है?, श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: सबसे उत्तम मंत्र कौन-सा है जिसे हर कोई उच्चारित कर सकता है? उत्तर:महाराज जी समझाते हैं कि सबसे उत्तम मंत्र वह है जो भगवान के नाम से जुड़ा हो। भगवान के नाम अनंत हैं — राम, कृष्ण, राधा, हरि — ये सभी नाम पवित्र हैं और इन्हें कोई भी उच्चारण कर सकता है।

माला-1060: गुरु-कृपा का वास्तविक अर्थ क्या है?, श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद जी महाराज

प्रश्न 1: महाराज जी, यदि हम अपनी बीमारी को राधा रानी की कृपा मानें, तो क्या यह सही है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज जी कहते हैं कि बीमारी स्वयं कृपा नहीं है, बल्कि उस बीमारी के बीच भी भक्ति और नाम-स्मरण में टिके रहना ही कृपा का वास्तविक स्वरूप है। रोग हमारे पिछले कर्मों का