माला-1174: भगवत-प्राप्त महापुरुष को कैसे पहचाना जाए? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: “आप इतने क्यूट कैसे हैं?”—संतों के आकर्षण का वास्तविक कारण क्या है? उत्तर:महाराज जी इस प्रश्न को हँसी में लेते हुए एक गहरी बात समझाते हैं। वे कहते हैं—सुंदरता संत की नहीं, इष्ट की होती है। वास्तविक सुंदरता श्रीजी और लाडली जी की है। संत तो उनके चरणों के दास होते हैं। जब

माला-1173: क्या माया वास्तव में माँ के समान है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: महाराज जी, माया से बचने के उपाय बताते समय आप कहते हैं कि बाधा माया नहीं, हमारी वासनाएँ हैं। इसका सही अर्थ क्या है? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज बहुत स्पष्ट करते हैं कि माया अपने आप में बाधक नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब मनुष्य वासना का शासन नहीं कर पाता।

माला-1172: आत्म-साक्षात्कार क्या है ? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: सहचरी भाव के लिए बाहरी वेश–भूषा (जटा, बाल, दाढ़ी) कितनी आवश्यक है? उत्तर:महाराज जी इस प्रश्न पर बहुत सहज और स्पष्ट भाव से उत्तर देते हैं। वे कहते हैं कि भक्ति का संबंध अंतर से है, बाहरी वेश से नहीं। कोई जटा रखे, कोई न रखे—इससे सहचरी भाव न आता है और न

माला-1171:क्या ज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग एक साथ चल सकते हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: व्रत, उपवास और संयम क्या शरणागति में बाधा बनते हैं? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि व्रत और उपवास का उद्देश्य मन को संयम में लाना है, मन को पवित्र बनाना है। यह साधना की प्रारंभिक अवस्था में सहायक होते हैं, लेकिन इनका कोई अंतिम या विशेष महत्व नहीं है।महाराज जी स्पष्ट

माला-1167:भगवत साक्षात्कार से पहले कोई विशेष लक्षण या अवस्था आती है क्या? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

महाराज जी

प्रश्न 1: पति के भजन का आधा फल पत्नी को मिलने का वास्तविक अर्थ क्या है? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी इस विषय को बहुत स्पष्ट और व्यावहारिक रूप से समझाते हैं। वे कहते हैं कि “आधा फल” मिलने की बात कोई गणितीय या यांत्रिक नियम नहीं है। यह धर्म, भाव और आचरण पर आधारित है।

माला-1166:पूर्व संस्कार और आदतें कैसे बदलती हैं? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

1. पूर्व संस्कार और आदतें कैसे बदलती हैं उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि मनुष्य की पुरानी प्रवृत्तियाँ भगवान के नाम-जप से ही बदलती हैं। नाम में इतनी सामर्थ है कि वह पूर्व पापों और पूर्व संस्कारों को नष्ट कर देता है। जिनकी प्रवृत्ति घोर पतन की थी, वे भी भगवान के नाम के

माला-1165:प्रेम और मोह में अंतर कैसे समझें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद महाराज जी

प्रश्न 1: अतीत की गलतियाँ, अपराधबोध और भय नाम-जप में बाधा बनते हैं, इससे मुक्त कैसे हों? उत्तर:श्री प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि जब तक हृदय पूरी तरह पवित्र नहीं होता, तब तक पुराने कर्म और संस्कार वासना बनकर सामने आते रहते हैं। यह इस जन्म के भी हो सकते हैं और पूर्व जन्मों

माला-1164:माया का सबसे सूक्ष्म रूप क्या है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद

प्रश्न : माया का सबसे सूक्ष्म रूप क्या है? उत्तर श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार माया का सबसे सूक्ष्म और गहरा रूप मन है। सामान्यतः लोग माया को धन, परिवार, भोग या संसार से जोड़कर देखते हैं, पर महाराज जी स्पष्ट करते हैं कि असली माया बाहर नहीं, भीतर है। जब तक मन में

माला-1163:गुरु-अपराध क्या है और इससे कैसे बचें? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद

प्रश्न 1: ऐसी कौन-सी तपस्या करूँ कि सारी सिद्धियाँ मेरे वश में आ जाएँ? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज स्पष्ट करते हैं कि सृष्टि के क्रम को बदल देना, सूर्य को रोक देना या अपनी इच्छा से प्रकृति को चलाना—यह सामर्थ्य केवल भगवान में है, किसी साधक या महात्मा में नहीं। आज तक जितने भी बड़े

माला-1162: अत्यंत शीघ्र भगवत प्राप्ति का कोई उपाय है? श्री प्रेमानंद महाराज जी के अमृत वचनों से नाम जप महिमा

श्री प्रेमानंद

प्रश्न 1: अत्यंत शीघ्र भगवत प्राप्ति का कोई उपाय है? रोना कैसे आए? उत्तर:श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि भगवत प्राप्ति का मार्ग किसी बाहरी उपाय से नहीं, बल्कि भीतर की विकलता से खुलता है। जब तक मनुष्य को अपने बल, अपने पुरुषार्थ और अपनी सामर्थ्य का भरोसा रहता है, तब तक उसके भीतर