माला-1019: संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के उत्तरों में छिपे दिव्य रहस्य

🕉️ 1. भजन की शक्ति और प्रारब्ध

प्रश्न: क्या भजन से प्रारब्ध भोगने की शक्ति आ जाती है?

उत्तर (श्री प्रेमानंद जी महाराज वाणी):
हाँ, भजन की ऐसी स्थिति भी आती है जहाँ साधक को अपने प्रारब्ध को भोगने की शक्ति प्राप्त हो जाती है। भजन से इतना सामर्थ्य आता है कि रोग, विपत्ति या कष्ट के बीच भी मन में चैन और आनंद बना रहता है। श्री प्रेमानंद जी महाराज जी कहते हैं, प्रारब्ध भोगना ही पड़ता है, पर भजन से वह असहनीय भी सहनीय हो जाता है।


✨ 2. राम नाम मणि का गूढ़ अर्थ

प्रश्न: “राम नाम मणि दीप धरु जिह दे हरी द्वार” — इसका भावार्थ?

उत्तर:
प्रेमानंद जी बताते हैं कि जिभ्या पर राम नाम का दीपक रख देने से बाहर के लौकिक कष्ट और भीतर के अज्ञान का अंधकार दोनों दूर हो जाते हैं। नाम ही वह दीपक है जो भीतर-बाहर आनंद फैला देता है।


🌸 3. सांगोपांग उपासना और अनन्यता

प्रश्न: सांगोपांग उपासना और अनन्यता का स्वरूप क्या है?

उत्तर:
एक गुरु, एक मंत्र, एक इष्ट, एक पंथ और एक ग्रंथ — यह है सांगोपांग उपासना। जब साधक केवल अपने मार्ग में पूर्ण समर्पित हो जाता है, वहीं से अनन्यता प्रकट होती है।


🔆 4. क्या नाम-जप से आत्म-साक्षात्कार संभव है?

उत्तर:
हाँ। नाम-जप से मोह का नाश होता है, बुद्धि शुद्ध होती है और फिर स्वरूप बोध होता है। जब संसार का चिंतन छूटता है और प्रभु का चिंतन सतत बना रहता है, तब आत्म-साक्षात्कार अपने आप हो जाता है।


💧 5. सांसारिक दुख में रोते हैं, प्रभु के लिए क्यों नहीं?

उत्तर:
क्योंकि हमारा अंतःकरण अभी मोह और अज्ञान से ग्रसित है। जब नाम-जप और सत्संग से अंतःकरण शुद्ध होता है, तब ही भक्ति की व्याकुलता आती है।


👣 6. राधा रानी की शरण कैसे मिले?

उत्तर:
राधा नाम जपना — यही सबसे बड़ा पुण्य है। नाम से बड़ा कोई ज्ञान, कोई तपस्या नहीं। प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं: “राधा राधा राधा राधा” — बस यही सबसे श्रेष्ठ साधना है।


🙏 7. प्रतिदिन श्रीजी से कैसी प्रार्थना करें?

उत्तर:
हे लाडली जू! मेरा मन आपके सुमिरन, सदाचरण और सेवा में लगा रहे। अंत समय में भी आपकी स्मृति बनी रहे। यही पूर्ण शरणागति है।


📘 8. धर्म और धर्म युक्त कर्म

उत्तर:
धर्म वही है जिसे शास्त्र विधान करे। धर्म से युक्त कर्म ही श्रेष्ठ है, वही भगवत प्राप्ति का मार्ग है। बिना धर्म के कर्म बंधनकारी हो जाता है।


😔 9. क्या समाज एक गलती को माफ करता है?

उत्तर:
भगवान माफ करते हैं, लेकिन समाज नहीं। इसलिए प्रेमानंद जी समझाते हैं कि आत्मा से तपस्या करो, लेकिन समाज से क्षमा की अपेक्षा मत रखो।


💖 10. निष्काम प्रेम की पहचान

उत्तर:
जब कोई कामना शेष नहीं रहती, तब प्रेम निष्काम होता है। सच्चा प्रेम अनुभव में आता है, वाणी में नहीं। जो कहता है “मुझे प्रेम है”, उसे नहीं है।


🍽️ 11. 400 ग्राम अन्न और गृहस्थ जीवन

उत्तर:
यह कोई आज्ञा नहीं, बल्कि एक प्रसंग था। गृहस्थ को शरीर की आवश्यकतानुसार पोषण लेना चाहिए। संयम ज़रूरी है, पर त्याग की होड़ नहीं।


🧘 12. बिना गुरु के भक्ति?

उत्तर:
एक सीमा तक संभव है, लेकिन मार्गदर्शन के बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता। गुरु का वचन ही सबसे बड़ी गुरु दीक्षा है।


🇮🇳 13. आर्मी में जाना और भक्ति

उत्तर:
राष्ट्र सेवा, भगवान की सेवा ही है। “हाथ में बंदूक, मुख में राधा नाम” — यही सच्ची भक्ति है। आर्मी में रहते हुए भी भजन संभव है।


🧠 14. भजन में मन क्यों भागता है?

उत्तर:
भूत और भविष्य का चिंतन मन को भटकाता है। जब हम नाम पर टिकते हैं, तब वह धीरे-धीरे शांत होता है। मन की चिप में संचित वासनाएँ निकलती हैं।


🏡 15. गृहस्थ धर्म और भक्ति

उत्तर:
गृहस्थ धर्म सबसे श्रेष्ठ है। संयम और नाम-जप से ही भगवत प्राप्ति संभव है। भगवान ने भी गृहस्थ में अवतार लिया।


🎭 16. सुख-दुख का कारण

उत्तर:
दोनों ही — पूर्व कर्म और भगवान की कृपा — कारण हैं। दुख से भगवान हृदय को मजबूत करते हैं। यह कृपा का कठोर, पर लाभकारी रूप है।


❤️ 17. जब कोई अन्याय करे तो?

उत्तर:
वह हमारे ही कर्मों का फल है। किसी व्यक्ति को दोषी मानना हमारे लिए हानिकारक है। उसके लिए सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।


🕊️ 18. सेवा और सुमिरन में संतुलन

उत्तर:
बाहरी सेवा के साथ, भीतरी सुमिरन आवश्यक है। केवल सेवा विकारों को नहीं रोक सकती। जब चिंतन अनन्य हो, तब सेवा भी साधना बन जाती है।


⚠️ 19. विरक्त साधकों के लिए सावधानियाँ

उत्तर:
कामिनी, कंचन, कीर्ति — यही तीन पतन के मूल कारण हैं। सेवा करते हुए भी स्त्री में देवी का भाव रखें। भगवती दृष्टि रखें। यही रक्षा है।

CREDIT:

यह लेख संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के एकान्तिक वार्तालाप प्रवचन की अमृत वाणी पर आधारित है।

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