माला-1024: श्री प्रेमानंद जी महाराज के अमृत वचनों से जीवन के जटिल प्रश्नों के सरल उत्तर
1. मृत्यु का विचार – डर या भक्ति का द्वार ? श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि “मरना है” – यह वाक्य नकारात्मक नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाई की याद है। मृत्यु का स्मरण व्यक्ति को नाम-जप, अच्छे कर्म और परोपकार की ओर प्रेरित करता है। जब कोई कहे “मैं मरना चाहता हूं”, तो